बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ देश की सुरक्षा पर भी ध्यान देना जरूरी: आर्मी चीफ
आर्मी चीफ ने अपने संबोधन में बताया कि ये माना जाता है कि सुरक्षा पर पैसा खर्चना ठीक वैसा ही जिसमें कोई फायदा नहीं होता. मैं इस भ्रम को हटाना चाहता हूं."
थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सुरक्षा के बदलते माहौल और भारतीय सेना की भूमिका को लेकर और सतर्क रहने पर जोर दिया है. मंगलवार को जनरल रावत ने कहा, "हमें बढ़ती इकोनॉमी के साथ-साथ देश की सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा". उन्होंने कहा, "चीन अर्थव्यवस्था के साथ-साथ मिलिट्री पावर भी बढ़ाना नहीं भूलते. इसी वजह से वो आज इतनी मजबूत स्थिति में खड़े हैं कि वो अमेरिका को भी चुनौती दे सकते हैं."
बिपिन रावत ने कहा, "ऐसी धारणा है कि रक्षा खर्च को बोझ की तरह देखा जाता है. ऐसा माना जाता है कि सरकार रक्षा क्षेत्र में जो भी खर्च करती है उसके बदले कुछ फायदा नहीं मिलता, लेकिन मैं इस धारणा को सही नहीं मानता. अगर इकोनॉमी बढ़ती है तो देश की सुरक्षा पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा."
थल सेना प्रमुख ने कहा है कि अगर आपकी अर्थव्यवस्था ऊपर जा रही है, तो आपको उसके साथ-साथ मिलिट्री पावर भी बढ़ानी होगी. तभी संतुलित विकास होगा और देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.
बिपिन रावत ने कहा, "क्या सुरक्षा का सारा पैसा मिलिट्री के मेन्टेनेंस में इस्तेमाल होता है? ये दूसरी गलतफहमी है जिसे मैं बदलना चहता हूं. हमारे बजट का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा देश बनाने में जाता है."
उन्होंने आगे कहा, "जब हम सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर बनाते है तो हम अपनी मुख्य ज़मीन से उन लोगों को जोड़ते हैं जो दूर इलाकों में रहते है. जो कि देश को एकजुट करने में मदद करता है."
आर्मी चीफ बिपिन रावत ने चाइना से मिटिंग को लेकर ट्वीट भी किया और बताया कि डोकलाम मुद्दे के बाद चाइना के साथ कोई मिटिंग नहीं हुई थी.
(साभार: न्यूज़-18)
संपादक- स्वतंत्र भारत न्यूज़
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