विशेष: भारत के विनाश का / भारतीय मुद्रा में गिरावट का मुख्य कारण सरकार का अमेरिकी दबाव में काम करना और स्वयं रुपये का अवमूल्यन करना: सच्चिदानन्द श्रीवास्तव
लखनऊ: आज भारतीय मुद्रा - ₹ (रुपया) गिरते-गिरते जिस स्थिति में पहुंच गया है, उससे स्पष्ट है कि अमेरिक के दबाव के कारण बनाई गई गलत कूटनीति / नीति / आर्थिक नीतियों के कारण भारत के 99.5% नागरिक विनाश के कगार पर पहुंच गये हैं तथा एक तरफ महंगाई, बेरोजगारी व बदहाली का दंश झेल रहा है तो दूसरी तरफ भय व असुरक्षाओं के बीच असीमित रूप से बढ़ते टैक्स व बिदेशी कर्ज चुकाने के भार तले दबता जा रहा है !
अमेरिका के दबाव के कारण ही हमारी सरकार ने एक तरफ ईरान से सबसे कम दामों पर मिलने वाला कच्चा तेल खरीदना बन्द कर दिया और रूस से कम दामों पर तेल खरीदना कम कर दिया तथा दूसरी तरफ FTA के मूल सिद्धांतों के बिरुद्ध FTA के स्थान पर फरवरी 2026 मैं अमेरिका के साथ Interim Trade Agreement के ढांचे को अंतिम रूप दे दिया जिसके अतंर्गत अमेरिका के लगभग $44 बीलियन डालर के भारतीय निर्यात पर 0% टैरिफ ( शून्य शुल्क ) कर दिया गया और अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर लगाये गए 18% (अठारह प्रतिशत) के Reciprocal Tarriffs (18% शुल्क) को स्वीकार कर भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर भारतीय नागरिकों के साथ इस देश को रसातल में पहुंचा दिया !
यदि इतिहास को देखें तो पता चलता है कि जब हमारा देश विकासशील नही था जो,
1940 से पहले ब्रिटिश भारत में इस्तेमाल होने वाली मुद्रा अर्थात एक रूपये के सिक्के 91.7% शुद्ध चांदी के होते थे !
1940 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चांदी की किल्लत के कारण ब्रिटिश सरकार ने एक रुपये के चांदी के सिक्के में चांदी की शुद्धता 91.7% से कम करके 50% कर दी जिसे क्वाटरनरी सिल्वर कहा गया !
1947 में सरकार ने चांदी के एक रूपये के सिक्के को पूरी तरह से बन्द करके शुद्ध निकेल (Pure Nickel) के सिक्के जारी किये !
आजादी के बाद 1950 में चांदी के स्थान पर तांबे और निकेल के मिश्रित धातु के सिक्के और फिर एल्यूमिनियम के सिक्के से होते हुए भारतीय मुद्रा रुपया कागजों और अब डिजिटल में तब्दील हो गया और हम विकासशील देशों में चिन्हित होने चले गए !
ज्यों, ज्यों प्रधानमंत्री बनते गये, मंत्रिमंडल का विस्तार और रूपये के अवमूल्यन का और जनता के विनास की कहानी आगे बढ़ती गई !
भारतीप मुद्रा - ₹ ( रूपये ) में गिरावट और अमेरिकी मुद्रा - $ ( डालर ) में मजबूती:-
#15 अगस्त 1947 - 27 मई 1964: P.M. (स्व. जवाहर लाल नेहरू)
#15 अगस्त 1947:-
₹1 एक रूपये या ₹03.30 (तीन रूपये 30पैसा) = $1 एक डालर
#26 जनवरी 1950:-
₹4.76 लगभग = $1
#09 जून 1964 - 11 जनवरी 1966: P.M. (स्व. लाल बहादुर शास्त्री)
₹4.76 = $1
#24 जनवरी 1966 - 24 मार्च 1977: P.M. (स्व. इंदिरा गांधी)
*24 जनवरी 1966:
₹4.76 = $1
**06 जून 1966 (रूपये का पहला अवमूल्यन):
₹7.50 = $1
***24 मार्च 1977:
₹08.74 = $1 (₹ का दूसरा अवमूल्यन)
#*24 मार्च 1977 - 28 जुलाई 1979: P.M. (स्व. मोरारजी दरसाई)
*28 जुलाई 1979:-
₹8.13 = $1
#*28 जुलाई 1979 - 14 जनवरी 1980: P.M. (स्व. चौ. चरण सिंह)
*14 जनवरी 1980:
₹7.86 = $1
#14 जनवरी 1980 - 31 अक्टूबर 1984: P.M. (स्व. इंदिरा गांधी)
*31 अक्टूबर 1984:
₹11.36 = $1
31अक्टूबर 1984 - 02 दिसम्बर 1989: P.M. (स्व. राजीव गांधी)
*02 दिसम्बर 1989:
₹16.23 = $1
#*02 दिसम्बर 1989 - 10 नवम्बर 1990: P.M. (स्व.वी.पी.सिंह)
*10 नवम्बर 1990:
₹17.50 = $1
#*10 नवम्बर 1990 - 21 जून 1991: P.M. (स्व. चन्द्रशेखर)
*21 जून 1991:
₹17.90 = $1
##*21 जून 1991 - 16 मई 1996: P.M. (P.V.नरसिम्हा राव)
**₹35.43 = $1डालर
#16 मई 1996 - 01 जून 1996: P.M (स्व. बाजपेई)
₹35.40 से 35.50 = $1 डालर
#*01 जून 1996 - 21 अप्रैल 1997 P.M. (स्व. देवगौड़ा)
₹35.80 से 36 = $1 डालर
#*21 अप्रैल 1997 - 19 मार्च 1998: P.M. (स्व. इन्द्र कु. गुजराल)
*19 मार्च 1998:
*₹41.26 = $1 डालर
#*19 मार्च 1998 - 22 मई 2004: P.M. (स्व. बाजपेई)
*22 मई 2004:
₹45.32 = $1 डालर
##*22 मई 2004 से 26 मई 2014: P.M. (डा. मनमोहन सिंह)
**₹58.50 से 58.94 = $1 डालर
##26 मई 2014 - लगातार P.M. (नरेन्द्र मोदी)
*30 मई 2019:
₹69.76 लगभग = $1 डालर
*आज 19 जून 2026:
₹94.34 = $1 डालर (उच्चतम गिरावट के स्तर पर |
आप उपरोक्त प्रधानमंत्री-काल में भारतीप मुद्रा में अर्थात ₹ (रूपये) सर्वोच्च गिरावट #मोदी_काल में देखेंगे तो पायेंगे कि, किस प्रकार भारतीप मुद्रा ₹ (रुपये) के बिनाशकारी गिरावट से भारतवर्ष और भारतीय नागरिकों का क्रमश: बिनाश जारी है और देश व देशवासी #आर्थिकी_गुलामी की बेड़ियों में जकड़ते जा रहे हैँ !
आईए, महापरिवर्तन का संकल्प लें -
"मां भारती को आर्थिक गुलामी की बेड़ियों से आजादी दिलाएंगे" !
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