विशेष: गणतंत्र बनाम आरक्षण
प्रयागराज: भारत में गणतंत्र दिवस को बहुत अहम दिन माना जाता है। इस दिन हमारे देश का संविधान लिखा गया था। गणतंत्र दिवस से सभी भारतीयों की भावनाएं जुडी हुई हैं। गणतंत्र के ६९ वर्ष पूरे हो गए हैं। आजाद के बाद देश को चलाने के लिए डॉ भीमराव अम्बेडकर के नेतृत्व में हमारे देश का संविधान लिखा गया, जिसे लिखने में पूरे 2 साल 11 महीने और 18 दिन लगे। 26 जनवरी 1950 ई• को सुबह 10:18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया था और इसी उपलक्ष्य में हम 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाने लगे। गणतंत्र दिवस की पहली परेड 1955 ई• को दिल्ली के राजपथ पर हुई थी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति तिरंगा फहराते हैं और हर साल 21 तोपों की सलामी दी जाती है। 1950 ई• से हम गणतंत्र दिवस को हर वर्ष ढ़ेर सारे हर्ष और खुशी के साथ मनाते हैं।
२०१९ ई• में ७० वां गणतंत्र दिवस मनाया जा रहा है। गणतंत्र दो शब्दों से मिलकर बना है- गण और तंत्र गण का शाब्दिक अर्थ है दल/ समूह/ लोक और तंत्र का शाब्दिक अर्थ है डोरा/ सूत (रस्सी) अर्थात ऐसी रस्सी/ डोरा जो लोगों के समूह को जोड़े- लोकतंत्र कहलाता है। भारत में लोकतंत्र है और राजनेताओं ने लोकतंत्र का आधार, आरक्षण को बना दिया है। भ्रष्ट प्रशासन, शिक्षा से लेकर न्याय तक का राजनैतिककरण होना , लोकतंत्रात्मक प्रणाली का जुगाड़ तंत्रात्मक हो जाना आदि अन्य सामाजिक कुरीतियों ने जन्म ले लिया। सत्य अहिंसा विरोधी रथ पर सवार हो सत्ता के चरम शिखर पर पहुंचने वाले सुधारकों की मनोदशा ठीक नहीं है सुधारकों की प्रवृत्ति ठीक होती तो देश में आरक्षण को लेकर राजनीति न होती। शिक्षा समाज का दर्पण है। इस परिपेक्ष्य में शिक्षा का बहुजन हिताय स्वरुप प्रधान होकर गरीब तथा वंचित वर्ग का नेतृत्व करता दिखाई देता है / भारत में शैक्षिक प्रबंधन अच्छा नहीं है। दि:२५-८-१९४९ ई• में संविधान सभा में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति आरक्षण को मात्र १० वर्ष सीमित रखने के प्रस्ताव पर एस• नागप्पा व बी• आई• मुनिस्वामी पिल्लई आदि की आपत्तियां आईं। डॉ• भीम राव अम्बेडकर ने कहा मैं नहीं समझता कि हमें इस विषय में किसी परिवर्तन कि अनुमति देनी चाहिए, यदि १० वर्ष में अनुसूचित जातियों कि स्थिति नहीं सुधरती तो इसी सरंक्षण को प्राप्त करने के लिए उपाय ढूढ़ना उनकी बुद्धि शक्ति से परे न होगा। आरक्षणवादी लोग डॉ• अम्बेडकर की राष्ट्र सर्वोपरिता की कद्र नहीं करता। आरक्षणवादी लोगों ने राष्ट्र का संतुलन खराब कर दिया है। आरक्षणवादी लोग वोट की राजनीति करने लगे हैं, न कि डॉ• अम्बेडकर के सिद्धांत का अनुपालन कर रहे है। आरक्षण को ख़त्म कर देना चाहिए है। आरक्षण कोटे से चयनित आई•ए•एस•/ पी• सी• एस• /इंजीनियर/ डॉक्टर आदि अपने कार्य का संचालन ठीक से नहीं कर पाते है क्यों कि उनको कोटे के तहत उभारा गया। ताजा स्थिति यह है कि आरक्षण राष्ट्रीय विकास पर हावी है।
अतः गणतंत्र को पुनःजीवित करने के लिए आरक्षण को वोट की राजनीति से दूर रखना होगा। आरक्षण विकास का आधार नहीं हो सकता। आरक्षण लोकतंत्र का आधार नहीं हो सकता। आरक्षण समुदाय को अलग करने का काम करता है, न कि जोड़ने का: ऐसी डोर जो समुदाय या लोगों को जोड़े वह है लोकतंत्र। लोकतंत्र का आधार सिर्फ और सिर्फ विकास हो सकता है क्योंकि डोर या रस्सी रूपी विकास ही समूह को जोड़ने का आधार है। लोकतंत्र का आधार विकास होना चाहिए न कि आरक्षण।
लेखक - वार्नर कॉलेज ऑफ़ डेरी टेक्नोलॉजी, सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज, नैनी, प्रयागराज ;इलाहाबाद के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर एण्ड प्राक्टर - डा• शंकर सुवन सिंह हैं।
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