भारत में शत्रु देशों की संपत्तियों का मुद्रीकरण: गृह मंत्रालय
नई-दिल्ली (PIB): शत्रु संपत्तियों का निपटान/मुद्रीकरण शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 और उसमें निर्मित निम्नलिखित नियमों एवं दिशा-निर्देशों के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है,
- शत्रु संपत्ति नियम, 2015;
- शत्रु संपत्ति के निपटान के लिए दिशानिर्देश आदेश, 2018;
- शत्रु देशों के शेयरों की बिक्री की प्रक्रिया एवं तंत्र संबंधी आदेश, 2019;
- शत्रु की अचल संपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया एवं तंत्र संबंधी आदेश, 2020।
शत्रु संपदाओं के निपटान/मुद्रीकरण से पहले, अचल शत्रु संपदाओं का मूल्यांकन उस जिले के जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित मूल्यांकन समिति द्वारा किया जाता है, जहां वह संपदा स्थित है। एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की शत्रु संपदाओं के लिए, सूचीबद्ध मूल्यांककों के माध्यम से बाजार मूल्य निर्धारण भी किया जाता है। मूल्यांकन रिपोर्ट भारत के लिए शत्रु संपदा संरक्षक (सीईपीआई) द्वारा शत्रु संपदा निपटान समिति के समक्ष रखी जाती है, जो शत्रु संपदाओं के निपटान के संबंध में केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें देती है।
28.01.2026 तक, 2,930.00 करोड़ रुपये मूल्य की चल और अचल शत्रु संपत्तियां बेची जा चुकी हैं।
इसके अलावा, सरकार ने शत्रु संपत्तियों के मुद्रीकरण में तेजी लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- दिनांक 25.04.2024 को अधिसूचना जारी की गई जिसमें सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पदेन उप अभिरक्षक, एसडीएम को पदेन सहायक अभिरक्षक, तहसीलदारों को पदेन निरीक्षक और सीईपीआई क्षेत्रीय कार्यालयों में तैनात उप सचिवों को शत्रु संपत्ति के पदेन उप अभिरक्षक के रूप में कार्य करने का निर्देश दिया गया।
- शत्रु संपत्ति की नीलामी में बोली लगाने वालों को आकर्षित करने के लिए, पूर्व-बोली बयाना राशि जमा (ईएमडी) को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है और बिक्री मूल्य के भुगतान की अवधि 21 दिनों से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है।
- यदि किसी शत्रु संपत्ति के लिए तीन ई-नीलामी के दौरान कोई बोली प्राप्त नहीं होती है, तो आरक्षित मूल्य में 10 प्रतिशत की कमी कर दी जाती है और संपत्ति की फिर से ई-नीलामी की जाती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ रुपये से कम और शहरी क्षेत्रों में पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की शत्रु संपत्ति को कब्जेदार को खरीद का प्रस्ताव।
- शत्रु संपत्ति की नीलामी के प्रचार-प्रसार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी)।
- सीईपीआई मुख्यालय में नियमित अधिकारियों की नियुक्ति।
गृह राज्य मंत्री श्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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