केन्द्रीय बजट वित्त वर्ष 2026-2027: केमिकल पार्क
भारत के केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूत बनाना
नई-दिल्ली (PIB): केमिकल पार्क हेतु केन्द्रीय बजट वित्त वर्ष 2026-2027 का उद्देश्य "भारत के केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूत बनाना है।"
मुख्य बातें
केन्द्रीय बजट 2026-27 में एक चुनौती-आधारित मार्ग के जरिए तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने में राज्यों की मदद हेतु एक नई योजना की घोषणा की गई है।
ये पार्क क्लस्टर-आधारित और प्लग-एंड-प्ले मॉडल को अपनायेंगे, जिसमें साझा किए गए बुनियादी ढांचे और मानक जलवायु संबंधी अनुपालन सुविधाएं होंगी।
इन केमिकल पार्कों की स्थापना में सहायता प्रदान करने हेतु वित्त वर्ष 2026–27 के बजट अनुमान (बीई) में 600 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य घरेलू केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग को मजबूत करना, आयात पर निर्भरता कम करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है।
कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) के विकास और तैनाती को समर्थन प्रदान करने हेतु 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई है।
भूमिका
भारत दुनिया का छठा सबसे बड़ा रासायनिक (केमिकल) पदार्थों का उत्पादक देश है। इसमें वैश्विक रासायनिक मूल्य श्रृंखला में, खासकर उच्च मूल्य और विशेषता वाले खंड में, अपनी उपस्थिति को और सशक्त करने की अपार क्षमता है। रासायनिक (केमिकल) क्षेत्र औद्योगिक विकास और निर्यात का एक मुख्य वाहक बना हुआ है और इसे गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु में स्थापित उन हब एवं क्लस्टर से समर्थन मिल रहा है, जिन्होंने निवेश को आकर्षित किया है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित किया है। इसी बुनियाद से आगे बढ़ते हुए, बुनियादी ढांचे के समेकन पर ध्यान देकर, नियामक प्रक्रियाओं को आसान बनाकर, और जलवायु संबंधी अनुपालन ढांचे को मजबूत करके प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने का एक बेहतरीन मौका सामने है।
इस संदर्भ में, केन्द्रीय बजट 2026-27 में समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने का केन्द्र सरकार का प्रस्ताव एक दूरदर्शी, बुनियादी ढांचे पर आधारित और आपूर्ति-पक्ष से जुड़ी पहल है। इसके लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान (बीई) में 600 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। एकीकृत, प्लग-एंड-प्ले (उपयोग के लिए तैयार) सुविधाएं और समन्वित शासन प्रदान कर, इन पार्कों से परियोजना में लगने वाले समय और लागत को कम किए जाने, क्लस्टर-आधारित तालमेल को बढ़ावा देने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी ऐसे केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने की उम्मीद है जो स्थायी और समावेशी विकास को समर्थन प्रदान करेंगे।
केन्द्रीय बजट 2026-27: घरेलू केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा
केन्द्रीय बजट 2026-27 में राज्यों को एक चुनौती-आधारित चयन व्यवस्था के जरिए तीन समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने में मदद करने हेतु एक नई योजना शुरू की गई है। इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान (बीई) में 600 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इन पार्कों को क्लस्टर-आधारित और प्लग-एंड-प्ले मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम के रूप में देखा जा रहा है, जिन्हें एक जैसा बुनियादी ढांचा और साझा सुविधाओं का सहयोग मिलेगा। यह पहल केमिकल पार्क से संबंधित बुनियादी ढांचे के लिए समर्पित बजटीय सहायता का पहला उदाहरण है। इसका उद्देश्य घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताओं को मजबूत करना, आपूर्ति-श्रृंखला के समेकन को बढ़ाना और रासायनिक (केमिकल) क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम करना है।
केमिकल उद्योग: एक नजर में
भारत का केमिकल उद्योग मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम का एक अहम हिस्सा है, जो कृषि, दवा (फार्मास्यूटिकल), वस्त्र, वाहन (ऑटोमोबाइल) और निर्माण जैसे अहम क्षेत्रों को जरूरी उत्पादक सामग्री (इनपुट) आपूर्ति करता है और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 7 प्रतिशत का योगदान देता है। दुनिया में छठा सबसे बड़ा और एशिया में तीसरा सबसे बड़ा केमिकल उत्पादक होने के नाते, भारत 80,000 से अधिक उत्पादों का निर्माण करता है, जिसमें थोक और विशिष्टता वाले केमिकल, कृषि संबंधी रसायन (एग्रोकेमिकल्स), पेट्रोल आधारित रसायन (पेट्रोकेमिकल्स), बहुलक (पॉलीमर्स) और उर्वरक (फर्टिलाइजर) शामिल हैं। इस बड़े दायरे में, विशिष्टता वाला केमिकल एक ऐसा खंड बनकर उभरा है जो लगातार मजबूत हो रहा है, जिसका आधार भारत की प्रक्रियात्मक क्षमता, लागत संबंधी प्रतिस्पर्धात्मकता और बढ़ती नवाचार क्षमता है। इसके संरचनात्मक महत्व को दर्शाते हुए, आर्थिक समीक्षा 2025-26 में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2024 में केमिकल सेक्टर का मैन्यूफैक्चरिंग सकल मूल्य वर्धन में 8.1 प्रतिशत हिस्सा था और साथ ही पिछले दशक में आउटपुट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। प्रमुख रसायनों (केमिकल्स) और पेट्रो-रसायनों (पेट्रोकेमिकल्स) का उत्पादन वित्त वर्ष 2016 में 45,638 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 58,617 हजार मीट्रिक टन हो गया, जोकि 2.8 प्रतिशत के चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) के बराबर है।
केमिकल पार्क क्या होते हैं?
केमिकल पार्क ऐसे योजबद्ध औद्योगिक क्लस्टर होते हैं जिन्हें खास तौर पर केमिकल और पेट्रोकेमिकल के मैन्यूफैक्चरिंग के लिए डिजाइन किया जाता है, जहां कई इकाइयां एक साथ काम करती हैं और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा तथा एक जैसी सुविधाएं साझा करती हैं।
केमिकल पार्कों का रणनीतिक जोर
केमिकल पार्क की परिकल्पना केमिकल सेक्टर की नींव को मज़बूत करने हेतु एक व्यापक एवं बुनियादी ढांचा पर आधारित आपूर्ति-पक्ष से संबंधित पहल के तौर पर की गई है।
वर्तमान परिदृश्य और केमिकल पार्कों के पक्ष में तर्क
भारत के केमिकल उद्योग को पहले ही प्लास्टिक पार्क, थोक दवा पार्क और पेट्रोलियम, केमिकल्स एवं पेट्रोकेमिकल्स इन्वेस्टमेंट रीजन (पीसीपीआईआर) जैसे क्लस्टर-आधारित विकास मॉडल से लाभ हुआ है, जिन्होंने साझा बुनियादी ढांचे, एंकर निवेश और समन्वित नियोजन के फायदे प्रदर्शित किए हैं। इन सफल अनुभवों के आधार पर, प्रस्तावित केमिकल पार्क को एक समन्वित दृष्टिकोण के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें थोक, विशिष्टता वाले और डाउनस्ट्रीम खंड सहित व्यापक केमिकल मूल्य श्रृंखला शामिल होगी।
एक ही स्थान पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक बुनियादी ढांचा, साझा सुविधाएं, लॉजिस्टिक्स सहायता और आसान नियामक सुविधाएं देकर, इस पहल से उम्मीद है कि
- परियोजना के पूरे होने में लगने वाला समय और पूंजीगत लागत कम होगी,
- बड़े पैमाने पर उत्पादन और मजबूत बैकवर्ड एवं फॉरवर्ड इंटीग्रेशन संभव होगा,
- साझा सुविधाओं के जरिए पर्यावरण प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा बेहतर होगी, और
- घरेलू और वैश्विक, दोनों प्रकार के केमिकल बाजारों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
प्रस्तावित केमिकल पार्क और प्लास्टिक पार्क, ठोक दवा पार्क एवं पीसीपीआईआर जैसे मौजूदा क्लस्टर-आधारित पहल मिलकर केमिकल सेक्टर में क्लस्टर-आधारित औद्योगिक विकास के लिए एक एकीकृत नीतिगत संरचना का निर्माण करते हैं। लक्षित नीतिगत समर्थन और प्रौद्योगिकी को अपनाने, नवाचार तथा स्थायित्व को बढ़ावा देने के उपायों से समर्थित, इस समन्वित दृष्टिकोण से अगले दशक में घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग क्षमताओं के मजबूत होने और वैश्विक केमिकल मूल्य श्रृंखला में भारत के एकीकरण के बढ़ने की उम्मीद है।
प्लास्टिक पार्क स्थापित करने हेतु योजना
प्लास्टिक पार्क, प्लास्टिक कचरे को प्रबंधित करने, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने और केमिकल उद्योग को समर्थन प्रदान करने की भारत की रणनीति का एक अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। प्लास्टिक पार्क, एक ऐसा औद्योगिक जोन है जिसे खास तौर पर प्लास्टिक से जुड़े व्यवसायों और उद्योगों के लिए डिजाइन किया गया है। रसायन और पेट्रोरसायन विभाग ने यह योजना (2013-2014) प्लास्टिक प्रसंस्करण उद्योग की क्षमताओं को मजबूत करने व तालमेल बिठाने, निवेश, उत्पादन एवं निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से बनाई थी। बहुलक (पॉलीमर) और प्लास्टिक में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने हेतु, विभाग ने अलग-अलग राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में 13 उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित किए हैं। इस योजना के तहत परियोजना की लागत के 50 प्रतिशत हिस्से तक की केन्द्रीय अनुदान सहायता दी गई है, जो प्रति पार्क 40 करोड़ रुपये तक सीमित है। अब तक असम, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश सहित अलग-अलग राज्यों में 10 प्लास्टिक पार्क मंजूर किए गए हैं।
थोक दवा पार्कों को बढ़ावा देने की योजना
देश में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में दवाएं बेहद अहम हैं और नागरिकों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान करने हेतु उनकी निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना ज़रूरी है। जैसे-जैसे फार्मास्यूटिकल सेक्टर बढ़ रहा है, इसका निरंतर विकास तेजी से गुणवत्तापूर्ण थोक दवाओं की भरोसेमंद आपूर्ति हासिल करने और आपात स्थिति के दौरान मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाने की क्षमता पर निर्भर करती है।
इस संदर्भ में, घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना और बल्क दवा मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता हासिल करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। मैन्युफैक्चरिंग लागत को कम करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और बल्क दवा सेगमेंट में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों को दूर करने के मकसद से, सरकार ने 2020 में थोक दवा पार्क प्रमोशन योजना शुरू की। यह योजना फार्मास्युटिकल लचीलेपन को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख योजना के रूप में उभरी है, जो सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड टेस्टिंग सुविधाओं और साझा यूटिलिटीज़ तक पहुंच को आसान बनाती है, जिससे लागत प्रभावी, स्केलेबल और सुरक्षित घरेलू बल्क दवा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। यह इंडस्ट्री को इनोवेटिव कॉमन वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम के ज़रिए कम लागत पर पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने में भी सक्षम बनाती है, साथ ही संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और बड़े पैमाने पर उत्पादन से होने वाले फायदों को भी आसान बनाती है।
इस संदर्भ में, घरेलू क्षमताओं को मज़बूत करना और थोक दवा की मैन्यूफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता हासिल करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है। मैन्यूफैक्चरिंग लागत को कम करने, प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और थोक दवाओं के खंड में बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करने के उद्देश्य से, सरकार ने 2020 में थोक दवा पार्क प्रोत्साहन योजना शुरू की। यह योजना फार्मास्यूटिकल संबंधी लचीलेपन के एक प्रमुख माध्यम के रूप में उभरी है, जो सामान्य बुनियादी ढांचा, मानक परीक्षण सुविधाओं और साझा सुविधाओं तक पहुंच को आसान बनाती है, जिससे किफायती लागत, मापनीय एवं सुरक्षित घरेलू थोक दवा उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। यह उद्योग जगत को रचनात्मक साझा अपशिष्ट प्रबंधबन प्रणाली के ज़रिए कम लागत पर पर्यावरणीय मानकों को पूरा करने में भी सक्षम बनाती है और साथ ही संसाधनों के बेहतर उपयोग एवं बड़े पैमाने पर उत्पादन का लाभ भी देती है।
थोक दवा पार्क को बढ़ावा देने की योजना के तहत गुजरात, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश में तीन थोक दवा पार्कों की स्थापना की गई, जिसका कुल खर्च 3,000 करोड़ रुपये था। इसका उद्देश्य विश्व-स्तरीय साझा बुनियादी ढांचा संबंधी सुविधाएं तैयार कर थोक दवा की मैन्यूफैक्चरिंग की लागत को कम करना था।
इस योजना के तहत, साझा बुनियादी ढांचा सुविधाओं (सीआईएफ) के निर्माण हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, जैसे कि:
• केंद्रीय अपशिष्ट उपचार संयंत्र (सीईटीपी)
• ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
• भारी बारिश के पानी की निकासी (स्टॉर्मवॉटर ड्रेनेज) नेटवर्क
• साझा विलायक भंडारण प्रणाली, विलायक पुनर्प्राप्ति एवं आसवन संयंत्र
• साझा गोदाम
• फैक्ट्री गेट पर जरूरी ट्रांसफार्मर के साथ समर्पित विद्युत सब-स्टेशन और वितरण प्रणाली
• कच्चा, पीने योग्य और डीमिनरलाइज्ड पानी
• वाष्प उत्पादन एवं वितरण प्रणाली
• साझा शीतलन प्रणाली एवं वितरण नेटवर्क
• साझा लॉजिस्टिक्स
• उन्नत प्रयोगशाला परीक्षण केन्द्र, जो एपीआई की जटिल परीक्षण/अनुसंधान संबंधी जरूरतों के लिए भी उपयुक्त हो, जिसमें माइक्रोबायोलॉजी लेबोरेटरी और स्टेबिलिटी चैंबर शामिल हैं
• आपातकालीन प्रतिक्रिया केन्द्र
• सुरक्षा/खतरनाक संचालन ऑडिट सेंटर, और
• राज्य सरकार/राज्य निगम द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे किसी भी आगामी थोक दवा पार्क में उत्कृष्टता केन्द्र, आदि।
पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर)
पेट्रोलियम, केमिकल और पेट्रोकेमिकल निवेश क्षेत्र (पीसीपीआईआर) एक खास तौर पर निर्धारित किया गया निवेश क्षेत्र है जिसे घरेलू और निर्यात-आधारित केमिकल और पेट्रोकेमिकल मैन्यूफैक्चरिंग के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह क्षेत्र उत्पादन इकाई, सुविधाओं, लॉजिस्टिक्स, पर्यावरण संरक्षण प्रणाली और प्रशासनिक सेवाओं को एकीकृत करता है, जिससे समग्र और समन्वित औद्योगिक विकास संभव होता है। यह तरीका मैन्यूफैक्चरिंग, निर्यात और रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को समर्थन करने हेतु एक स्थान पर स्थित (को-लोकेशन), साझा बुनियादी ढांचा और एकीकृत नियोजन का लाभ उठाता है। वर्तमान में, आंध्र प्रदेश (विशाखापत्तनम), गुजरात (दहेज) और ओडिशा (पारादीप) राज्यों में तीन पीसीपीआईआर डिजाइन किए गए हैं।
कुल मिलाकर, प्लास्टिक पार्क, थोक दवा पार्क, पीसीपीआईआर और केमिकल पार्क भारत के क्लस्टर-आधारित औद्योगिक विकास की ओर रणनीतिक बदलाव को दर्शाते हैं जो पैमाने, दक्षता और स्थिरता पर आधारित है। जबकि प्लास्टिक पार्क और थोक दवा पार्क ने विशिष्ट खंड में साझा बुनियादी ढांचा, लागत दक्षता और बेहतर पर्यावरणीय अनुपालन के लाभों को प्रदर्शित किया है, केमिकल पार्क इस एकीकृत, प्लग-एंड-प्ले मॉडल को व्यापक केमिकल मूल्य श्रृंखला में विस्तारित करके अधिक महत्व प्राप्त करते हैं।
जैसे-जैसे भारत अपनी केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता बढ़ा रहा है, पर्यावरण पर असर और औद्योगिक सुरक्षा संबंधी जोखिम अधिक अहम होते जा रहे हैं। लंबे समय तक विकास का समर्थन करने हेतु, मजबूत पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली होना और बड़े औद्योगिक क्लस्टर में उच्च स्तर के सुरक्षा मानक सुनिश्चित करना जरूरी है।
पर्यावरणीय प्रबंधन और औद्योगिक सुरक्षा को मजबूत बनाना
दिसंबर 2025 में शुरू की गई कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) जैसी हरित पहल, कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण में जाने से पहले अवशोषण करके, दोबारा उपयोग करके या सुरक्षित रूप से भंडारण करके औद्योगिक कार्बन उत्सर्जन को कम करने में अहम भूमिका निभाती हैं। केन्द्रीय बजट 2026-27 में अधिक उत्सर्जन वाले क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीक अपनाने पर जोर दिया गया है। अगले पांच वर्षों में केमिकल सेक्टर सहित प्रमुख उद्योगों में कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) तकनीक के विकास और उपयोग को समर्थन प्रदान करने हेतु 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
इस संदर्भ में, एकीकृत केमिकल पार्क इस जलवायु संबंधी लक्ष्य को अमल में लाने हेतु एक पूरक और सक्षम प्लेटफॉर्म प्रदान करते हैं। केमिकल पार्क का उद्देश्य साझा पर्यावरणीय बुनियादी ढांचा, साझा सुविधाएं और समन्वित शासन संबंधी ढांचा प्रदान करना है, जो सीसीयूएस और अन्य स्वच्छ तकनीक के किफायती इस्तेमाल के लिए जरूरी हैं। एक ही पार्क के भीतर इकाइयों का क्लस्टरिंग बड़े पैमाने पर उत्सर्जन प्रबंधन, अपशिष्ट शोधन और ऊर्जा-दक्षता से जुड़े उपायों को लागू करने में मदद करता है, जिससे प्रति इकाई लागत कम होती है और अनुपालन बेहतर होता है।
निष्कर्ष
तीन समर्पित केमिकल पार्क की स्थापना एक लक्षित, बुनियादी ढांचा-आधारित दृष्टिकोण के जरिए भारत के घरेलू केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। साझा सुविधाओं और साझा बुनियादी ढांचे द्वारा समर्थित क्लस्टर-आधारित, प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं प्रदान करके, यह पहल उन पुरानी संरचनात्मक बाधाओं को दूर करती है जिन्होंने इस सेक्टर में पैमाने, मूल्य श्रृंखला के एकीकरण और प्रतिस्पर्धात्मकता में रुकावट डाली थी।
केन्द्रीय बजट 2026-27 में बताई गई प्राथमिकताओं के अनुरूप, केमिकल पार्क के पहल से निवेश को बढ़ावा मिलने, आयात प्रतिस्थापन को सुविधाजनक बनाने, एमएसएमई को संगठित एवं कुशल मूल्य श्रृंखला में एकीकृत करने, रोजगार सृजित करने और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ मैन्यूफैक्चरिंग संबंधी कार्यप्रणालियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, बजट का कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (सीसीयूएस) के लिए समर्थन केमिकल पार्क का पूरक है। साथ ही, सीसीयूएस फंडिंग कम कार्बन उत्सर्जन वाले नवीन प्रयोगों का समर्थन करती है, जबकि केमिकल पार्क किफायती तैनाती के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा और सहायता प्रदान करते हैं। इसलिए, केमिकल पार्क पहल आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता को बढ़ाने और केमिकल मैन्यूफैक्चरिंग के लिए वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एवं विश्वसनीय केन्द्र के रूप में भारत के उदय को मजबूत करने के लिए तैयार है।
संदर्भ
बजट 2026-27
https://www.indiabudget.gov.in/doc/Budget_at_Glance/budget_at_a_glance.pdf
आईबीईएफ
https://www.ibef.org/blogs/how-the-chemical-industry-is-preparing-for-a-sustainable-future
https://www.ibef.org/industry/chemical-industry-india
लोकसभा एवं राज्यसभा
https://sansad.in/getFile/annex/269/AU245_FPMAK0.pdf?source=pqars
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय
https://chemicals.gov.in/pcpir
https://chemicals.gov.in/sites/default/files/Policies/PCPIRPolicy.pdf
https://pharmadept.gov.in/sites/default/files/Gazettee%20notification%20of%20bulk%20drug%20schemes_0_2.pdf
https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1845023®=3&lang=2
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
Carbon Capture, Utilisation and Storage (CCUS) | Department Of Science & Technology
नीति आयोग
https://niti.gov.in/sites/default/files/2025-07/NITI-Aayog-Chemical-industry-report.pdf
पीआईबी
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2120876®=3&lang=2
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