86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के समापन सत्र को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया सम्बोधित
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): लखनऊ में चल रहे तीन दिवसीय 86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) का बुधवार को समापन हुआ।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि, विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके।
उन्होंने इस संबंध में एक समिति के गठन की जानकारी भी दी।
श्री बिरला ने कहा कि, राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बन सकें।
उन्होंने कहा कि, सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।
उन्होंने सभी दलों के नेताओं व सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की तथा कहा कि, लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है, और जनता के प्रति हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण है।
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सभा के उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त किए।
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