भारत में नववर्ष- तिथि और महत्व: सच्चिदानन्द श्रीवास्तव
लखनऊ: आज हम "मीडिया और पुस्तकों" से मिली जानकारी के आधार पर भारत में सदियों से मनाये जाने वाले नव-वर्ष पर संक्षेप में इस विशेष प्रस्तुति में बताना चाहेंगे कि, 'भारत' में कोई एक प्राचीन नववर्ष नहीं है, बल्कि कई संस्कृतियाँ और क्षेत्र अपने-अपने पारंपरिक कैलेंडर के अनुसार अलग-अलग समय पर नववर्ष मनाते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख हैं:
विक्रम संवत (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा), शक संवत (राष्ट्रीय कैलेंडर, 22 मार्च), गुड़ी पड़वा/उगादी (महाराष्ट्र/दक्षिण भारत), बैसाखी (पंजाब) और पोहेला बैसाख (बंगाल), जो सभी वसंत ऋतु में आते हैं और प्रकृति, नई फसल व समृद्धि का प्रतीक हैं !
आइये हम कुछ प्रमुख प्राचीन नववर्ष और उनके समय के बारे में यहां बताते हैं !
कुछ प्रमुख प्राचीन नववर्ष और उनके समय:
विक्रम संवत (हिन्दू नववर्ष): चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल) से शुरू होता है, जो चैत्र नवरात्रि का पहला दिन होता है।
शक संवत (राष्ट्रीय कैलेंडर): भारत सरकार द्वारा अपनाया गया, यह 22 मार्च (लीप ईयर में 21 मार्च) को शुरू होता है।
गुड़ी पड़वा / उगादी: महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल) को मनाया जाता है।
बैसाखी (पंजाब): 13 अप्रैल के आसपास, फसल कटाई की शुरुआत के प्रतीक.के रुप में मनाया जाता है !
पोहेला बैसाख (बंगाल): 14 या 15 अप्रैल को बंगाल और बांग्लादेश में मनाया जाता है।
विशु (केरल): 13 या 14 अप्रैल को.मनाया जाता है।
चेटी चंड (सिंधी): उगादी/गुड़ी पड़वा के दिन मनाया जाता है। .
नवरेह (कश्मीरी): मार्च के आसपास मनाया जाता है।
महत्व:
ये सभी नववर्ष पश्चिमी नववर्ष (जनवरी) से अलग हैं, जो उत्तरी गोलार्ध में ठंड के दौरान आता है।
भारतीय नववर्ष वसंत ऋतु में आते हैं, जब प्रकृति नई जान लेती है, फसलें पकती हैं, और यह समृद्धि व नई शुरुआत का प्रतीक होता है।
अतैव हम अब आपके अंतर्मन पर छोड़ते हैं कि, आपको कौन सा नववर्ष मना चाहिए और कब !
सच्चिदानन्द श्रीवास्तव
मोबाइल नंबर: 8765531599
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