पंद्रहवें वित्त आयोग ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ विभिन्न मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया
नई-दिल्ली (PIB): पंद्रहवें वित्त आयोग (XVएफसी) ने 04 सितंबर 2020 को अपनी सलाहकार परिषद और विशेष रूप से आमंत्रित अन्य विशेषज्ञों के साथ एक ऑनलाइन बैठक की और उन विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया, जिनसे आयोग को निपटना होगा। पंद्रहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री एन.के. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में वित्त आयोग के सभी सदस्यों और आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। सलाहकार परिषद की ओर से और विशेष आमंत्रित विशेषज्ञों में शामिल डॉ. अरविंद विरमानी, डॉ. इंदिरा राजारमन, डॉ. डी के श्रीवास्तव, डॉ. एम गोविंदा राव, डॉ. सुदीप्तो मुंडले, डॉ. ओंकार गोस्वामी, डॉ. कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन, डॉ. प्रणब सेन एवं डॉ. शंकर आचार्य इस बैठक में उपस्थित थे और उन्होंने अपने-अपने विचार सामने रखे। आयोग कल भी प्रतिष्ठित विद्वानों की एक और टीम के साथ बैठक करेगा, ताकि उनके विचारों से अवगत हुआ जा सके।
बैठक के दौरान जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में वृद्धि, केंद्र एवं राज्यों के कर संग्रह में उछाल, जीएसटी संबंधी क्षतिपूर्ति और राजकोषीय समेकन या मजबूती से जुड़े अनेक मुद्दों पर विस्तार के साथ विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय, निवेश के फिर से रफ्तार पकड़ने, वित्तीय प्रणाली के पुनर्पूंजीकरण एवं सार्वजनिक वित्त पर इसके प्रभाव, रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर फोकस, जीएसटी संग्रह के उभरते रुझान और इसके प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म में सुधार या बेहतरी के साथ इसके संबंध से जुड़े विशिष्ट मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चाएं की गईं।
सलाहकार परिषद को यह प्रतीत हुआ कि वित्त आयोग मौजूदा समय में अनिश्चितताओं की एक अप्रत्याशित स्थिति का सामना कर रहा है और आयोग को ऐसे में राज्यों को कर अंतरण, अन्य हस्तांतरण, राजस्व संग्रह में भारी कमी के बीच उधारी सहित अन्य तरीकों से व्यय के वित्तपोषण और राजकोषीय समेकन या मजबूती के मार्ग के बारे में सूक्ष्म दृष्टिकोण अपनाना होगा। परिषद के सदस्यों ने यह भी महसूस किया कि आयोग को विशेषकर 2021-22 से लेकर 2025-26 तक के 5 वर्षों की अवधि में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में अपरंपरागत रूप से सोचना होगा। उन्होंने सलाह दी कि आधार वर्ष 2020-21 के साथ-साथ 2021-22 के पहले वर्ष पर उन शेष चार वर्षों की तुलना में अलग हटकर विचार करने की आवश्यकता हो सकती है क्योंकि इस अवधि के दौरान राजस्व की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार या बेहतरी होने की उम्मीद है।
बैठक के दौरान त्रैमासिक आंकड़ों के मद्देनजर चालू वर्ष के दौरान जीडीपी वृद्धि दर के साथ-साथ बाद के वर्षों में विकास के पटरी पर आने की संभावनाओं पर भी अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए। सलाहकार परिषद को यह प्रतीत हुआ कि जीडीपी के सापेक्ष सामान्य सरकारी ऋण के प्रारंभिक वर्षों में बेहद तेजी से बढ़ने की संभावना है। हालांकि, बाद के वर्षों में इसमें कमी लाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए। प्रारंभिक वर्षों में यह अनुपात राजस्व-व्यय के बढ़े हुए असंतुलन के न्यूमरेटर (अंश के ऊपर का अंक) पर रहने और जीडीपी के नीचे आने के रुझान के न्यूमरेटर पर रहने से प्रभावित होगा।
अध्यक्ष ने इस बात का उल्लेख किया कि बैठक के दौरान विचार-विमर्श काफी अहम रहा और आयोग ने इस दौरान दिए गए सुझावों को अपने ध्यान में रखा है। पंद्रहवां वित्त आयोग और उसकी सलाहकार परिषद विश्व स्तर के साथ-साथ घरेलू स्तर पर भी उभर रही स्थिति पर बारीकी से अपनी पैनी नजर रख रहे हैं।
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