20 मई को सुमित्रानंदन पन्त की जयंती मनाई गई - हिंदी साहित्य के वर्ड्सवर्थ है सुमित्रानंदन पंत!
संत कबीर नगर: सोमवार 20 मई को हिंदी साहित्य के 'विलियम वर्ड्सवर्थ' कहे जाने वाले प्रकृति के सुकुमार कवि, छायावाद के प्रमुख स्तंभ, प्रकृति के कुशल चितेरे कवि पं• सुमित्रानंदन पंत की जयंती के उपलक्ष मे प्रभा देवी स्नाकोत्तर महाविद्यालय, खलीलाबाद के सभागार में आयोजित एक समारोह में वक्ताओं ने पंत जी की उम्मीद भरी कविताओं के जरिए उन्हे याद करते हुए पढ़ा______
कल की चिन्ता भूलो क्षण भर,
लाला के रँग की हाला भर
प्याला मदिर धरो अधरों पर !
फेन-वलय मृदु बाँह पुलकमय
स्वप्न पाश सी रहे कंठ में,
निष्ठुर गगन हमें जितने क्षण
प्रेयसि, जीवित धरे दया कर।
समारोह का शुभारंभ महाविद्यालय की प्रबंधक श्रीमती पुष्पा चतुर्वेदी ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
महाविद्यालय की प्रबंधक - श्रीमती पुष्पा चतुर्वेदी ने सभी शिक्षकों को, प्रशिक्षुओं को, आगामी सेमेस्टर परीक्षा की शुभकामना देते हुए उन्होने कड़ी मेहनत, अनुशासन व एकाग्रमन के साथ पढाई करने और अपने लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रेरित किया।
प्राचार्य डाक्टर प्रमोद कुमार त्रिपाठी ने कहा कि छायावादी युग के प्रवर्तकों में सुमित्रानंदन पंत का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। इनकी कविता में ना सिर्फ छायावादी प्रवृत्ति वरन् अपने समय में विकसित विचारधाराओं का वरण दिखाई देता है।
समारोह को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता नवनीत मिश्र, स्वतंत्र पत्रकार ने बताया कि, "पंत सर्वश्रेष्ठ कवियों में शुमार हैं। उन्होंने अपनी रचनाओं ने समाज को नई दिशा देने का काम किया। वे मानवतावादी कवि थे। उन्होंने समाज को एकसूत्र में बांधने का काम किया था। उनके आदर्शों पर चलकर ही अच्छे समाज की परिकल्पना की जा सकती है। पंत को प्रकृति से बेहद प्रेम था। उनकी रचनाएं प्रकृति से उनके प्रेम को दर्शाती हैं।"
समारोह को संबोधित करते हुए श्रीमती राज श्री चतुर्वेदी व अन्य वक्ताओं ने सभी के उज्जवल भविष्य की कामना की कार्यक्रम का संचालन- श्रीमती संगीता सिंह ने किया तथा इस अवसर पर रितेश त्रिपाठी, विनोद कुमार मिश्र, मनीष त्रिपाठी, पी• एन• विश्वकर्मा, दीपक सिंह, उमेश सिंह, सुश्री सोनी पांडेय, मनीष सिंह सहित अनेक लोग उपस्थित थे।
नवनीत मिश्र, स्वतंत्र पत्रकार
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