विशेष: रचना: आज की बेटियां....: अवनीश श्रीवास्तव
लखनऊ: जो बेटी है....... तथा "आज की बेटियां" शीर्षक से रचनाकार -अवनीश श्रीवास्तव अपनी रचना गोरखपुर से भेजी है।
उनकी प्रस्तुति पेश है:-
माँ बाप की शान होती हैं बेटियां
हर होठों की मुस्कान होती है बेटियां
क्यु फर्क करते हो एबेटो और बेटियों में बस एक बार प्यार भरा हाथ फेर दो इनके सर पेएसर तुम्हारा र्गव से उठा देंगी ये बेटियाए
ये उभरेंगी बन कर संगीत हर दिलो कीएहौसला दो इन्हे तुम्हारा नाम रोशन करेंगी ये बेटिया।
बेटो और बेटियों में फर्क ना समझ रे नादानएवो प्यार वो सम्मान बेटियों को भी दो क्योकि बेटो से कम नही हैं आज की बेटियां।
मायके में बेटी ससुराल में बहु हर रिश्तो को निभाती हैं येबेटियां।
क्यो मार देते हो र्गभ में इन्हे एएक बार सिने से लगा कर के देखो हर खुशियां तुम पर लुटा देंगी ये बेटियां।
बोझ नही होती हैं ये किसी पे बस खुले आसमान में उडने का मोका तो दो इन्हेएतुम्हारे कदमो में झूका देंगी ये सारी दुनिया ऐसी ताकत रखती हैं आज की बेटियां।
अपनी पहचान खुद लिखेंगी अपने सम्मान की रक्षा खुद करेंगीएएक बार इनके साथ कदम से कदम मीला के तो चलो बेटो से कई गुना आगे निकलेंगी ये बेटिया।
बन्दिशे हटा दो इन पर से खुल के सांस तो लेने दो इन्हे एदेख लेना एक दिन इतिहास लिखेंगी ये बेटियां
बुढापे मे तुम्हारा साथ छोड दे अगर बेटाए तो तुम्हारे बुढापे कि लाठी भी बनेंगी ये बेटियां
दो उनको भी बेटो जितना प्यार .दुलार तुम्हारे घर को स्वर्ग बना देंगी ये बेटियां
बेटी बचाओ बेटी पढाओ
रचना - "अवनीश श्रीवास्तव, गोरखपुर"
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