NTPC हादसा: प्रदेश और केंद्र सरकार NTPC हादसा की एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों से जाँच करने से क्यों भाग रही हैं ?- _____Raghu Thakur
NTPC हादसा: प्रदेश और केंद्र सरकार NTPC हादसा की एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों से जाँच करने से क्यों भाग रही हैं ?-
Raghu Thakur
NTPC हादसा: प्रदेश और केंद्र सरकार NTPC हादसा की एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों से जाँच करने से क्यों भाग रही हैं ?-__ Raghu Thakur
फोन पर लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय संरक्षक- रघु ठाकुर से NTPC हादसे पर प्रतिक्रिया ली गयी तो श्री ठाकुर ने बड़े ही सहज भाव से बताया कि हादसे के तकनिकी कारणों की तह तक पहुँचना है और भविष्य में ऐसी तकनिकी दुर्घटनाओं को रोकना है तो, एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों से इसकी जाँच देशहित और जनहित दोनों में परम आवश्यक है., हमें समझ में नहीं आ रहा है कि सरकार इतने बड़े NTPC हादसे की जांच एटॉमिक रिसर्च सेंटर से क्यों नहीं कराना चाहती ?-
लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष - श्री सच्चिदा नन्द श्रीवास्तव ने प्रदेश सरकार से पुछा है कि, क्या भारत वर्ष ऐसे विकाशशील देश में ऊंचाहार के पास स्थित NTPC में इतना बड़ा हादसा तकनिकी कारणों से हुआ है या मात्र परियोजना को पीएम के हाथों लोकार्पण कराने की हड़बड़ी में हुआ, या परियोजना के कार्य में भरी भ्रष्टाचार था, या तीनों कारण थे ? श्री श्रीवास्तव ने सरकार से यह भी पूछा कि, जो समाचार आ रहे हैं कि NTPC में 500 मेगावाट क्षमता की जिस छह नंबर इकाई पर हादसा हुआ, वहां उस समय 250-300 मजदूर काम कर रहे थे, तो कार्य पूरा होने के एनटीपीसी प्रबंधन के दावे को सही कैसे माना जा सकता है ?-
अतैव अब यह एक बड़ा सवाल पैदा हो गया है कि फिर इतने मजदूर काम पर क्यों लगाए गए थे ?
लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय संरक्षक - श्री रघु ठाकुर केँद्र व् राज्य सरकार से पुनः मांग की है कि NTPC में बॉयलर फटने की जांच एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिकों से कराई जाय और दोषियों के ऊपर कार्यवाही की जाय.
समाचार यह भी है कि, एनटीपीसी शीर्ष प्रबंधन 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री के हाथों इस इकाई का लोकार्पण कराकर रिकॉर्ड समय में काम पूरा कराने का श्रेय लूटने की फिराक में था और NTPC एनटीपीसी की ऊंचाहार तापीय परियोजना में रिकॉर्ड समय में 500 मेगावाट क्षमता की नई इकाई की स्थापना का श्रेय लेने की शीर्ष प्रबंधन की कोशिश इतने बड़े हादसे का सबब बनी। सत्ता में बैठे राजनीतिक आकाओं को खुश करने के चक्कर में ढाई दर्जन लोगों की बलि चढ़ा दी गई।
यही नहीं, इतने बड़े हादसे की जांच के नाम पर भी लीपापोती की तैयारी है। इस जांच को लेकर अभी से सवाल उठने लगे हैं। परियोजना से जुड़े लोग ही दबी जुबान में कह रहे हैं कि ‘बड़ों’ को बचाने की पटकथा लिख दी गई है। नीचे के अधिकारियों और ठेकेदारों को बलि का बकरा बनाकर पूरे मामले को रफा-दफा करने की तैयारी है।
____स्वतंत्र भारत न्यूज़ संवाददाता


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