पुलिस-तंत्र का अव्यवस्थित होना ही बढ़ते अपराध का कारण है: पूर्व जिला जज व आर्बिट्रेटर-उच्च न्यायालय
लखनऊ: सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश व हाईकोर्ट लखनऊ बेंच के आर्बिट्रेटर- राम नाथ सिंह ने कहा कि, "पुलिस तंत्र का अव्यवस्थित होना बढ़ते अपराध का कारण है"।
उन्होंने कहा कि, "थानों में प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) लिखवाना आम जनता के लिए कठिन कार्य हो गया है। थानेदार क़ानून का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसा लगता है थानेदार क़ानून के मालिक बन गए हैं। थाने में थानेदार अपनी मन मर्जी चलाता है। कई बार भुक्त भोगी थाने का चक्कर लगाने के बाद असहाय व कमजोर महसूस करता है। थानेदारों के इस प्रकार के रवैये से भुक्तभोगी सिर्फ अदालत पर ही भरोसा करता है। इस समय अदालतें कोरोना वायरस महामारी के चलते सख्त नियम के तहत सीमित दायरे में कार्य कर रही हैं। अतएव भुक्तभोगी अदालत जा कर भी सहूलियत नहीं ले पा रहा है"।
श्री राम नाथ सिंह ने कहा कि, "थानों में जुर्म पीड़ित व्यक्ति को दूर खड़ा कर अछूत जैसा व्यवहार किया जाता है। थानाध्यक्ष की अनुपस्थिति में कार्यभार साधक दरोगा उनके आगमन तक मौन धारण कर लेते हैं। थाने में सिपाही से लेकर थानेदार तक सभी अकर्मण्य बने हुए हैं। भुक्त भोगी की रिपोर्ट की सत्यता छुपाकर सम्बंधित पुलिस अधिकारी शासन को गलत रिपोर्ट भेज देते हैं। परिणामस्वरूप अपराधकृत पीड़ा की आग सुलगती रह जाती है, जो भीषण अपराध का कारण बनती है।
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