ब्रिक्स घोषणापत्र से चीन-पाक के रिश्तों में आ सकता है तनाव
ब्रिक्स घोषणापत्र से चीन-पाक के रिश्तों में आ सकता है तनावब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों का नाम शामिल किए गए हैं।बीजिंग, प्रेट्र। एक चीनी विद्वान ने अपनी सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि ब्रिक्स घोषणापत्र में पाकिस्तान स्थित कुछ आतंकी समूहों के नाम शामिल करने से पाकिस्तान नाराज हो सकता है। इस कदम से पाकिस्तान के साथ चीन के रिश्तों में तनाव भी आ सकता है। यह भारत के लिए ही जीत हो सकती है जिसने इसके लिए बहुत काम किया है।सरकारी 'चाइना इंस्टीट्यूट ऑफ कन्टेम्परेरी इंटरनेशनल रिलेशंस' के निदेशक हू शीशेंग ने कहा कि आगामी महीनों में चीनी राजनयिकों को पाकिस्तान के सामने बहुत सारे स्पष्टीकरण देने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज में हक्कानी नेटवर्क का नाम शामिल करना 'मेरी समझ से परे है।' अफगानिस्तान में सक्रिय यह समूह वहां नाटो सैन्य बलों को निशाना बनाता है। हू शीशेंग ने कहा, 'इस समूह का प्रमुख अफगानिस्तान तालिबान का वास्तविक मुखिया है। इससे अफगानिस्तान की राजनीतिक समझौता प्रक्रिया में चीन की भूमिका और मुश्किल हो जाएगी या यूं कहें कि भविष्य में कोई भूमिका ही नहीं होगी।' ब्रिक्स घोषणा पत्र में लश्कर ए तैयबा, जैश ए मोहम्मद, तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी संगठनों का नाम शामिल किए गए हैं।हू शीशेंग ने कहा, 'यह मेरी समझ से परे है कि चीन इसके लिए राजी कैसे हो गया। मुझे नहीं लगता कि यह एक अच्छा विचार है। मुझे लगता है कि इस घोषणापत्र को तैयार करने वाले लोग गुमराह हो गए थे।'उन्होंने कहा कि जैश ए मोहम्मद को इसमें शामिल करने के बाद चीन शायद अब इसके नेता मसूद अजहर पर प्रस्तावित संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध पर रोक लगाने के अपने रुख पर पुनर्विचार करेगा। इस घोषणापत्र से पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा, खासतौर पर तब जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उसे अपनी जमीन पर इन आतंकी समूहों को पनाह देने के लिए चेतावनी दे चुके हैं।हू शीशेंग ने कहा, 'मैं लश्कर ए तैयबा और जैश ए मोहम्मद को आतंकी समूहों के रूप में शामिल करने के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन, पाकिस्तान के ही लश्कर ए झांगवी अल अलामी जैसे समूह इनसे ज्यादा खतरनाक हैं। यही बलूचिस्तान में दो चीनी युवाओं की हत्या के लिए जिम्मेदार था। चीन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट का नाम शामिल करने पर सहमत हो सकता था। इसका भी आधार पाकिस्तान में है। लेकिन, यह चीन के लिए बहुत महंगा सौदा है।'यह भी पढ़ें: मोदी ने बजाया ब्रिक्स में भारत का डंका, विकास और आतंकवाद पर दिए कई सुझावBy Manish Negi Let's block ads! (Why?)


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