प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जिस नए भारत के निर्माण की बात करते हैं उसमें वामपंथी उग्रवाद के लिये कोई जगह नहीं है : अमित शाह
वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए उन्हे उपलब्ध होने वाले धन को रोकना आधारभूत मंत्र है – श्री अमित शाह केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद का लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहीं है केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकारों के समन्वय से वामपंथी उग्रवाद को निर्मूल किया जा सकता है वामपंथी उग्रवाद की घटनाएँ 2009 में 2258 से घटकर 2018 में 833 हुई – श्री अमित शाह
नईदिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज यहाँ वामपंथी उग्रवाद पर केंद्रसरकार के कई मंत्रियों, प्रभावित राज्य के मुख्य मंत्रियों, मुख्य सचिवों तथाकेंद्र व राज्यों के आला अधिकारियों के साथ बैठक की और कहा किवामपंथी उग्रवाद पिछले कुछ दशकों से देश के सामने बड़ी चुनौती है।
उनका कहना था कि वामपंथी उग्रवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास नहींकरता और वामपंथी उग्रवादी सत्ता हथियाने एवं अपने लाभ के लिए सबसेकम विकसित क्षेत्रों में निर्दोष लोगों को गुमराह करते हैं।
श्री शाह ने कहाकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी जिस नए भारत के निर्माण की बात करतेहैं उसमें वामपंथी उग्रवाद की कोई जगह नहीं है।उनका कहना था किबंदूक के बल पर विकास और लोकतंत्र को झुकाने में वामपंथी उग्रवाद कोकभी सफलता नहीं मिलेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद में पहले से काफी गिरावटआई है।
उनका कहना था कि जहाँ 2009 में वामपंथी उग्रवाद की 2258 घटनायें हुईं वहीं 2018 में घटकर 833 हुई हैं।
उन्होंने बताया कि पिछलेसाल केवल 60 जिलों में वामपंथी उग्रवाद की घटना नोट की गई है औरइस कमी में राज्य सरकार, राज्य के सुरक्षा बल तथा केंद्रीय बलों के संयुक्तप्रयासों से सफलता प्राप्त हुई है।
उन्होँने कहा कि हमें समन्वय के साथ कामकरना होगा तभी वामपंथी उग्रवाद को निर्मूल किया जा सकता है।
श्री शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के लिए उन्हे उपलब्ध होने वाले धन को रोकना आधारभूत मंत्र है और इसके द्वारा उनकेरहने, खाने-पीने, घूमने, हथियारों की खरीद, ट्रेनिंग आदि व्यवस्थाओं कोरोका जा सकता है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मेरा यह मानना है कि वामपंथी उग्रवाद की घटनाएँ निरंतर कम हो रही हैं इसे खत्म करने का प्रयास उसी तरह सेजारी रहना चाहिये।
श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए वर्ष 2015 में एक राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना बनाई गई थी इसमें सुरक्षा सेसंबंधित उपायों के साथ-साथ विकास के कार्यों, स्थानीय समुदायों केअधिकारों और हकधारियों को सुनिश्चित करना इत्यादि शामिल है। उनकाकहना था कि 2015 की राष्ट्रीय नीति के अंतर्गत स्थानीय नागरिकों केअधिकारों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि पुलिस बलोंका आधुनिकीकरण भी किया जा रहा है।
श्री शाह का कहना था कि उग्रवादप्रभावित राज्यों में स्थानीय पुलिस की सतर्कता और दक्षता के बिनावामपंथी उग्रवाद समाप्त नहीं किया जा सकता इसलिये उनकी भूमिकामहत्वपूर्ण है।
श्री शाह ने विशेष रूप से कहा कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मंत्रालयों कीप्रमुख योजनाओं के अलावा वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिएविशिष्ट पहल की गई हैं जिनमें प्रमुख तौर पर सड़क एवं टेलीकॉमकनेक्टिविटी में सुधार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा शिक्षा शामिलहै। उन्होंने एकलव्य मॉडल के अंतर्गत खोले जाने वाले स्कूलों की गति तेजकरने, साथ ही सभी नागरिकों को 5 किलोमीटर के भीतर बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की बात कही।
केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्य सरकारों को विश्वास दिलाया की वामपंथी उग्रवादको निर्मूल करने में केंद्र सरकार पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने कहा किसुरक्षाबलों को माओवादियों से निपटने के लिये सक्रिय रणनीति बनाने कासमय आ गया है और आतंक की घटनाओं को हर कीमत पर टालना जरूरीहै।
श्री शाह का कहना था कि विगत वर्षों में आईडी की घटनाओं से काफीनुकसान हुआ है जिन्हें रोकने के लिए सभी उपायों को लागू करना होगा।
श्री शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के अंतर्गत जो निर्दोष फंसे हैं उन्हेंउग्रवाद की धारा से मुख्यधारा में वापस लाना जरूरी है और उनकेआत्मसमर्पण को बढ़ावा देना चाहिये। उनका कहना था कि इस प्रकार हमसबको मिलकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नये भारत की परिकल्पनाको साकार करना है|
बैठक के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार एक तय समयसीमा में वामपंथी उग्रवाद के समूल निवारण तथा क्षेत्रों के सर्वांगीण विकासको सुनिश्चित करने के लिये कृत संकल्प है।
बैठक में केन्द्र सरकार के वित्त, सड़क परिवहन और राजमार्ग, कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, कौशल विकास और उद्यमिता, जनजातीय मामले, गृह राज्य मंत्री, के साथ आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश,झारखंड, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
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