लहू बोलता भी है: जंग ए आजादी ए हिंद के मुस्लिम किरदार- मौलाना अबुल सेराज ग़ुलाम मोहम्मद बहावलपुरी
-आइए, जानते हैं जंग ए आजादी ए हिंद के एक और मुस्लिम किरदार - मौलाना अबुल सेराज ग़ुलाम मोहम्मद बहावलपुरी को.....
मौलाना अबुल सेराज ग़ुलाम मोहम्मद बहावलपुरी:
आप मौजा दीनपुर, खानपुर (बहावलपुर) के रहने वाले थे और हाफ़िज़ मोहम्मद सिद्दीक के ख़लीफ़ा थे। चूंकि दीनपुर पूरी तरह जंगे.आजादी का मरकज़ था इसलिए आप ख़ुद ख़िलाफ़त कमेटी के सदर रहकर अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ जंग के लिए अवाम में तबलीग़ किया करते थे।
आपकी इस इलाक़े में बहुत इज़्ज़त थी। आपकी एक आवाज़ पर हज़ारों लोग घरों से निकलकर मैदान में आ जाते थे। आप भी शेख-उल-हिन्द की मिशन तहरीक में एक अहम मुक़ाम रखते थे। रेशमी ख़तूत के जरिये पूरी तैयारी करके इंक़लाब शुरू ही होने वाला था कि किसी ने अंग्रेज हुकूमत को खबर कर दी। बड़ी तादात में ब्रिटिश फ़ौज दीनपुर व उसके यतराफ में पहुंच गयी और घरों की तलाशी का काम शुरू कर दिया।
आपको अंग्रेज़ अफ़सर गिरफ़्तार करना चाहते थे लेकिन तलाशी में कुछ न पाकर और अवाम की बड़ी तादात देखकर मौक़े पर गिरफ़्तार नहीं कर सके लेकिन, "आपको बड़े अफ़सर से मुलाक़ात कराने के लिए ले जा रहें है" कहकर अपने साथ बहाने से लेकर चले गये और सीधे ले जाकर नज़रबंद कर दिया।
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