लहू बोलता भी है: जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार - जनरल नेयाज़ मोहम्मद खान
आइए जानते हैं, जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- जनरल नेयाज़ मोहम्मद खान को________
नेयाज़ मोहम्मद खान दोअबा के रहनेवाले थे। आप सन् 1857 के दौराने.बग़ावत फ़ौज से बाग़ी होकर अपने वतन लौट आये। वहां अज़ीमाबाद व आस-पास के जो सिपाही और मुजाहिद थे, उन्हें आपने सूरजपुर में इकट्ठा किया और सबको साथ लेकर रात में गंगा पार करके क्यूल पहुंचे। वहीं क़याम कर आगे की तैयारी करना थी कि इसी बीच एक ग्रुप शम्साबाद से भी क्यूल पहुंच गया और वह भी साथ हो लिया।
27 जून सन् 1857 को ब्रिगेडियर होपग्राॅट को ख़बर कहीं से यह हो गयी। तब होप ने दूसरी रात अचानक हमला बोला, लेकिन अंग्रेज़ी फ़ौज को नाकामयाबी का मुंह देखना पड़ा।
इसके बाद सभी मुजाहेदीन गंगापुर के जंगलात की तरफ कूचकर गये। उन लोगों की तादात तक़रीबन तीन हज़ार के आस.पास थी।
दूसरे दिन अंग्रेज़ी सेना ने पूरी तैयारी से हमला किया। काफ़ी देर मुक़ाबला हुआ, लेकिन असलहे खत्म होने की वजह से जो मुजाहिद बच सके। उसमें से कुछ नदी पार करके फरार हो गये, जबकि बाक़ी मारे गये। जनरल नेयाज़ मोहम्मद खान को भी फ़रार होना पड़ा। किसी तरह छुपते.छुपाते आप मक्का.मुअज्ज़मा चले गयेए जहां से सन् 1872 में जूनागढ़ आकर आपने नवाब के यहां मुलाज़िमत कर ली।
नवाब के किसी काम के सिलसिले में एक बार आप बम्बई गये। उन दिनों वहां गवर्नर.जनरल आया हुआ था, इसलिए चारों तरफ जासूस घूम रहे थे।
इस बीच किसी ने आपको पहचान लिया और मुख़बिरी की बिना पर आप गिरफ़्तार कर लिये गयेय मुक़दमा चला और सज़ा.ए.मौत का हुक्म हुआ। बाद में हाईकोर्ट से सज़ाए मौत के फैसले को बदलकर ता.हयात कैद कर दिया। आप अण्डमान भेजे गये और वहीं इन्तक़ाल कर गये।
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