लहू बोलता भी है: जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- रईसुल अहरार मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी
आइये जानते हैं,
जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- रईसुल अहरार मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी को________
रईसुल अहरार मौलाना हबीबुर्रहमान लुधियानवी:
आप हिन्दुस्तान के मशहूर मज़हबी व सियासी रहनुमा और तहरीके-आज़ादी- ए-हिन्द के अलमबरदार थे। 3 जुलाई सन् 1892 को लुधियाना के इल्मों-दीन के लिए मशहूर ख़ानदान मे पैदा हुए थे। आपका खानदान सन् 1857 ही से फिंरगियों से जूझता रहा है।
आपने शुरू की तालीम अपने दादा मौलाना शाह मोहम्मद से हासिल की जो कि एक मशहूर आलिम और मुजाहिद थे। इसके बाद दारुल उलूम ;देवबंदद्ध आकर पढ़ाई की। दारुल उलूम मे दौराने-तालीम ही आपने अपनी सियासी ज़िन्दगी की शुरूआत की।
तहरीक़े-आज़ादी के सिलसिले में आप गिरफ्तार हुए और दो साल लुधियाना, अम्बाला और मियांनवाली के जेलो मे रहे आख़री बार दिसम्बर सन् 1940 मे लाहौर से गिरतार हुए और 4 जुलाई सन् 1945 को रिहाई अमल मे आयी।
आपने तक़रीबन 15 साल जेल की सलाखो मे रहकर जे़हनी व जिस्मानी तकलीफ़े झेली। सन् 1947 के हंगामे के बाद देहली आकर बस गये और यहीं पर 2 सितम्बर सन् 1956 को इस दुनिया से कूचकर गए।
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