लहू भी बोलता है: जंगे आज़ादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- अब्दुल रहीम: सैय्यद शाहनवाज अहमद कादरी
आइये जाानते हैैं, जंगे आजादी ए हिन्द के एक और मुस्लिम किरदार- प्रोफेसर अब्दुल अलीम को____
अब्दुल अलीम तमिलनाडु के रहनेवाले थे तथा आपके वालिद मशहूर इन्कलाबी लीडर अब्दुल रहीम साहब थे।
आप भी अपने वालिद और अपने शाही टीपू खानदान की तजऱ् पर अंग्रेज़ों के खि़लाफ़ तहरीक में सरगर्म रहते थे।
आप नौजवानों को हुकूमत के खि़लाफ़ बगावत के लिए ट्रेनिंग दिया करते थे।
आप जिस काॅलेज में पढ़ाते थे, वहां के लड़कों को काॅलेज में ही हिन्दुस्तान की आज़ादी की अहमियत और अंग्रेज़ों के जुल्म की कहानी सुनाकर वाॅलेन्टियर बनाते थे।
आपकी इन कार्यवाहियों और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ तक़रीरों से अंग्रेज़ अफ़सर बहुत नाराज़ थे बग़ावत को बढ़ाने के इल्ज़ाम में आप गिरफ्तार किये गये और थाने में आपको काफ़ी मारा-पीटा गया, फिर उसके बाद जेल भेजा गया।
दो साल की सज़ा काटकर जब आप आये तो फिर से एक जलसे में शरीक होने जा रहे थे कि दोबारा गिरफ़्तार कर लिये गये।
आप कई बार जेल आते-जाते रहे, मगर अपनी इंक़लाबी कार्यवाहियों को नहीं छोड़ा।
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