IPC की धारा 497: नारी के तन व मन पर उसका स्वतः का अधिकार है, वरना यह भी एक प्रकार की ज्यादती होगी: रघु ठाकुर
नयी दिल्ली: दिल्ली की सुबाई सरकार ने धारा 497 भा. द. स. (IPC) को बनाये रखने का समर्थन किया है जिसमें पति की सहमति से पत्नी किसी से सम्बन्ध बना सकती है परन्तु सहमति तो पत्नी या महिला की होना चाहिए।
उक्त टिप्पड़ी प्रख्यात समाजवादी चिंतक व विचारक तथा लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रिय संरक्षक- रघु ठाकुर ने सोशल मीडिया पर की है। श्री ठाकुर ने face Book पर लिखा है कि, "दिल्ली की सूबाई सरकार ने IPC की धारा497 को बनाये रखने का समर्थन किया है जिसमें पति की सहमति से पत्नी किसी से सम्बन्ध बना सकती है।पर सहमति तो पत्नी या महिला की होना चाहिए।नारी के तन व मन पर उसका स्वतः का अधिकार है।वरना यह भी एक प्रकार की ज़ियादती होगी।"
आज सुप्रीम कोर्ट में व्यभिचार पर कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने IPC के सेक्शन 497 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने कहा जब संविधान महिला और पुरूष दोनों को बराबर मानता है तो आपराधिक केसों में ये अलग क्यों? कोर्ट ने कहा कि जीवन के हर तौर तरीकों में महिलाओं को समान माना गया है तो इस मामले में अलग से बर्ताव क्यों? जब अपराध को महिला और पुरुष दोनों की सहमति से किया गया हो तो महिला को संरक्षण क्यों दिया गया?
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