राजधानी में बिजली-पानी से रोजेदार हलकान.
उत्तर प्रदेश के मंत्री जो बालें, समझो उलटा होगा| यह तो झूठों की सरकार है| __ लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी
लखनऊ (उ.प्र.), 09 जून: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व बिजली मंत्री ने वायदा किया था कि, रमजान के दिनों में भरपूर बिजली मिलेगी और पानी की किल्लत नहीं होगी, लेकिन हो इससे उलटा रहा है|
बिजली की आवाजाही ने भीषण गर्मी और उमस में रोजेदारों का जीना हराम कर दिया है|
रात-रात भर बिजली आती-जाती रहती है|
यही नहीं जितनी देर बिजली आती है उतनी देर ट्रिपिंग के साथ वोल्टेज घटता-बढ़ता रहता है, ऐसे में बिजली के कीमती उपकरण फूंकते रहते हैं| पुराना लखनऊ हो या नया सब जगह बिजली का एक जैसा हाल है|
जब बिजली नहीं तो पानी भी नहीं मिल पाता, लोगों को पानी खरीदते या मांगते देखा जा सकता है |
कई मस्जिदों में समरसेबिल पंप होने के बाद बिजली न आने से पानी नहीं मिलने पर नमाज से पहले वज़ू के लिए पानी दूर-दराज से लाना पड़ा| दूसरी ओर गोमती नदी सूख रही है, जिससे जानवर तक प्यास से तड़प रहे हैं| इससे भी तकलीफदेह हालात में शहर के आम मोहल्ले अपनी रातें आँखों में और दिन सरकारी अमलों को कोसने में बिता रहे हैं| ख़ास तौर पर पुराने लखनऊ के सभी इलाके, अमीनाबाद, मौलवीगंज, गणेशगंज, चारबाग, लालकुआं, मकबूलगंज और हुसैनगंज, उदयगंज बेहद पीड़ित हैं और इनकी गुहार बिजली कर्मी से लेकर आला हुजूर भी नहीं सुन रहे?
राजधानी में लगभग 7 लाख उपभोक्ता है, जिसमे 90 फीसदी बिजली गुल से परेशान है|
गौरतलब है बिजली मंत्री लगातार रिकार्ड बिजली आपूर्ति के दावे कर रहे हैं, और तो और प्रधानमंत्री,केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री भी इसी से मिलते-जुलते दावे कर रहे हैं|
प्रधानमंत्री बाकायदा ‘सौभाग्य’ से बिजली पाए लोगों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सीधे बात कर रहे हैं जिसे मीडिया में खासतौर से प्रचारित किया जारहा है , जबकि ये लाभार्थी अधिकारियों द्वारा चुने जाते हैं| इसकी हकीकत जांचने की जरूरत है|
यहां बताते चलें कि राजधानी में कल महज एक घंटे हुई बारिश ने लगभग पूरे शहर को बेहाल कर दिया|
ऐसे में समझ नहीं आता जो लोग कष्ट भुगत रहे हैं वे सही बोल रहे हैं या जो बयान दे रहे हैं वो?
लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष- सच्चिदा नन्द श्रीवास्तव ने कहा कि, यह तो झूठों की सरकार है| इस सरकार में मंत्री जो बोले, समझो होगा इसका उल्टा|
बहरहाल बिजली-पानी दो वरना गद्दी छोड़ दो के नारे जगह-जगह बुलंद हो रहे हैं और उन पर पुलिस अपनी लाठियों के निशान छाप रही है!
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