फंसे ऋण के बोझ तले दबे बैंक
1.3 लाख करोड़ रुपये बढ़ा बैंकों का सकल एनपीए
मुंबई, 30 मई: पुनर्गठित संपत्तियों पर रिजर्व बैंक के नए नियमों के कारण सरकारी और निजी घरेलू बैंकों की सकल गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) मार्च, 2018 में खत्म चौथी तिमाही में 1.3 लाख करोड़ रुपये बढ़ गई। 37 सूचीबद्घ बैंकों के प्रदर्शन की एक समीक्षा के मुताबिक वित्त वर्ष 2017-18 की अंतिम तिमाही में एनपीए के लिए प्रावधान और आपात रकम भी बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। अभी बैंकों का सकल एनपीए 9.81 लाख करोड़ रुपये है। यह रकम अभी और बढ़ेगी क्योंकि इंडियन ओवरसीज बैंक और जम्मू ऐंड कश्मीर बैंक ने अभी अपने नतीजों की घोषणा नहीं की है।
जनवरी से मार्च 2018 में दौरान सकल एनपीए में 455 अरब रुपये की बढ़ोतरी हुई है। मार्च, 2018 के अंत तक इन सूचीबद्घ बैंकों का सकल एनपीए 4.95 लाख करोड़ रुपये था। बैंकरों का कहना है कि नुकसान के अलावा पुनर्गठित ऋण के संबंध में नियमों में बदलाव और नीरव मोदी तथा मेहुल चोकसी से जुड़ी आभूषण कंपनियों में निवेश के गबन के कारण एनपीए और प्रावधान में बढ़ोतरी हुई है।
इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और समूह प्रमुख (वित्तीय क्षेत्र रेटिंग्स) कार्तिक श्रीनिवासन के मुताबिक यह बैंकों की बैलेंस शीट में साफ सफाई को दर्शाता है। आरबीआई ने 12 फरवरी को मानक पुनर्गठित अग्रिम से संबंध नियमों में बदलाव किए थे और पुनरावृत्ति योजनाओं को खत्म किया था। इसलिए दवाब वाले उन खातों को एनपीए माना गया जहां एसडीआर, एस4ए और 5/25 योजनाएं लागू नहीं की गई थीं।
सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के अधिकारियों ने कहा कि नए नियम का बैंकों पर तिहरा प्रभाव पड़ा। पहला यह कि इससे बकाया एनपीए बढ़ गया। दूसरा बैंकों को उस ब्याज को वापस करना पड़ा जो वे पहले ही आय में शामिल कर चुके थे। इसके अलावा मानक पुनर्गठित अग्रिम के कारण बैंकों को एनपीए के लिए भारी प्रावधान करने पड़े। ज्यादा संकटग्रस्त ऋण सीधे संदिग्ध वाली श्रेणी में डालने से प्रावधान जरूरतों में भारी बढ़ोतरी हुई।
बैंकों को एनपीए को तीन श्रेणियों खराब, संदिग्ध और नुकसान संपत्तियों में बांटना पड़ता है। यह वर्गीकरण उस अवधि पर आधारित होता है जब तक कोई संपत्ति एनपीए रहती है। साथ ही इसमें बकाये की वसूली की संभावनाओं को भी देखा जाता है। दिल्ली के पंजाब नैशनल बैंक का एनपीए चौथी तिमाही में सबसे अधिक 291 अरब रुपये बढ़ा।
बैंक को दोहरी मार झेलनी पड़ी। एक तो नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की कंपनियों में अपने निवेश का गबन हो गया और फिर फंसे कर्ज के नए नियमों ने उसकी मुश्किलें बढ़ा दी। भारतीय स्टेट बैंक को चौथी तिमाही में 242 अरब रुपये और ऐक्सिस बैंक को 92.5 अरब रुपये का नुकसान हुआ। आरबीआई बैंकों की ऋण पुनर्गठन प्रक्रिया से खुश नहीं है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि बैंक फंसा कर्ज छुपाने के लिए ऐसा करते हैं।
(साभार- बिजनेस स्टैण्डर्ड)
संपादक- स्वतंत्र भारत न्यूज़
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