डा. ख्वाजा अब्दुल हमीद - आज़ाद ए हिन्द के मुस्लिम किरदार
लहू बोलता भी है
आइये जानते हैं, आज़ाद ए हिन्द के मुस्लिम किरदार -
डा. ख्वाजा अब्दुल हमीद जी को______
डा. ख्वाजा अब्दुल हमीद 31 अक्टूबर 1898 को ख्वाजा अब्दुल हमीद की पैदाइश उनके नाना ख़्वाजा मोहम्मद युसुफ़ साहब के घर अलीगढ़ में हुई थी। आपके वालिद का नाम ख्वाजा अब्दुल अली और वालिदा का नाम मसूद जहां बेगम था।
आपके वालिद वकालत करते थे और बाद में अंग्रेज़ी हुकूमत में आला ओहदे पर नौकरी करने लगे, जिसकी ख्वाजा अब्दुल हमीद ने मुख़ालिफ़त की।
इस वजह से उन्होंने अंग्रेज़ हुकूमत की नौकरी छोड़कर फिर से वकालत शुरू कर दी।
ख्वाजा हमीद ने सन् 1908 में शुरुआती पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मिंटो सर्किल से शुरू की इस्लामिया हाईस्कूल ;इटावाद्ध गये जहां से आगरा कॉलेज जाकर साइंस से ग्रेजुएशन किया। उसके बाद आपने मद्रास जाकर एक साल तक पढ़ाई की और लेदर ट्रेनिंग कॉलेज से डिप्लोमा लिया।
शुरू से ही ख्वाजा हमीद की सोच हिन्दुस्तान की आज़ादी के लिए थी।
जब महात्मा गांधी और अली बिरादरान ने सरकारी स्कूल.कालेजो बाइकाट का एलान किया तो ख़्वाजा अब्दुल हमीद ने भी सेन्ट्रल कॉलेज ;इलाहाबादद्ध में हड़ताल करा दी जिसकी वजह से यूनिवर्सिटी से निकाल दिये गये और वहां ग्रेजुऐशन सिरोमनी में ख़लल डालने के जुर्म में गिरफ्तार कर लिया गया।
जेल से छूटने के बाद आप अलीगढ़ वापस आ गये। सरकारी स्कूल.कालेजो के बाइकाट के बाद जंगे.आज़ादी के मुजाहेदीन ने अलीगढ़ में जामिया मिल्लिया इस्लामिया खोला। इसी में अब्दुल हमीद केमिस्ट्री पढ़ाने लगे। बाकी वक़्त में आप खादी के प्रचार और खादी बनवाने.बिकवाने की मुहिम में लग गये। उन्हीं दिनों चाचा के मकान पर आपकी मुलाक़ात महात्मा गांधीए मोतीलाल नेहरू और जवाहरलाल नेहरू से हुई। उसके बाद तो आप पूरी तरह से जंगे.आज़ादी के कामों में दीवानों की तरह लग गये।
इसी आंदोलन के दौरान जामिया में डाण् ज़ाकिर हुसैन से आपकी मुलाक़ात हुई और दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी। दोनों दोस्त जर्मनी पढ़ने जाना चाहते थे लेकिन पैसों की कमी से इरादा बदल दिया।
यह बात जब आपकी वालिदा को पता चली तो उन्होंने अपना दो क़िता मकान बेचकर आपको जर्मनी भेज दिया।
जर्मनी में ख्वाजा अबुल हमीद ने बेरियम कम्पाउंड्स पर रिसर्च कर पीण्एचण्डी हासिल की। उन्हीं दिनों आपकी एक लड़की से दोस्ती हुई और आपने उससे शादी कर ली।
जब जर्मनी पर नाज़ियो ने शिकंज़ा कसा तो ख़्वाजा साहब को अपनी बीवी की वजह से बर्लिन छोड़कर हिन्दुस्तान आना पड़ा।
वापस आकर आपने सन् 1928 में गुलाम भारत में अंग्रेज़ी दवा की पहली फैक्ट्री लगाने की तैयारी शुरू कीए जो सन् 1935 में अहमदाबाद में द केमिकल इण्डस्ट्रियल एण्ड फार्मास्युटिकल लेबोरेट्रीज के नाम से तैयार हुई।
हिन्दुस्तान के लिए यह एक बड़ा कारनामा अंजाम दिया।
ख्वाजा अब्दुल हमीद हिन्दुस्तान के क़ाबिल सांइसदां माने जाते थे।
आपको मुल्क के बंटवारे के वक्त मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान ले जाने की बहुत कोशिश की लेकिन ख्वाजा साहब अपनी सरज़मीन छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हुए।
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