पुलिसिया दिल्लगी से महिलाएं जल-मरने को मजबूर!
लखनऊ,06 अप्रैल 2018 : विधानभवन के सामने हर दूसरे दिन महिलायें पुलिस ,प्रशासन में सुनवाई न होने के चलते आत्मदाह जैसा कदम उठा रही हैं | दुष्कर्म की घटनाओं के अलावा भी कई ऐसी अपराध हैं जिनमें महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया है. सबसे तकलीफदेह स्तिथि तब होती है जब पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई मदद नही मिलती है. पुलिस प्रशासन की बेजवाबदारी की वजह से अपराधियों को बढ़ावा मिलता है. गजब ये कि कई मामलों में पुलिस ने पीड़िताओं को ही मुल्जिम बनाकर जेल भेज दिया ?
इनकी निष्क्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के नम्बर तीन गुडंबा थाने के पुलिसकर्मी चेन लूट की शिकार महिला पर ही भड़क गये, बोले जब गहने संभाल नही सकती तो पहनती क्यों हो? पीड़िता का कहना है कि यूपी की पुलिस से अच्छी मुंबई की पुलिस है जो मदद तो करती है.
अपराधियों के हौसले इतने बुलंद होते है कि उन्हें कानून का भी डर नही होता है, उन्नाव में शाम ५ बजे साईकिल से बाजार जा रही युवती को रास्ते में जिन्दा जलाकर मार डाला गया. हत्यारों का सुराग नही मिला और मारने की वजह भी पता नही चल सकी. कुछ ऐसा ही मामला बलिया का है जहाँ २० हजार रूपए न चुकाने पर सूदखोरों ने ५० साल की महिला रेशमा को केरोसिन डालकर जला दिया. २० हजार रूपए की कर्जदारी चुकाने के लिए रेशमा ने अब तक २ लाख रूपए चुका दिए थे और सूदखोर रकम की वापसी के लिए दबाव बना रहे थे. एक कर्ज न चुकाने की इतनी बड़ी सजा? बाराबंकी में एक युवती की हत्या कर उसके टुकड़े टुकड़े करके बैग भरकर आग लगा दी. युवती की शिनाख्त नही हो सकी और हत्या का कारण भी मालूम नही हो सका.
अपराधों की श्रंखला में बच्चों व लड़कियों का अपहरण उनकी खरीद फरोख्त का धंधा भी खूब फलफूल रहा है. महिलाओं का एक गैंग है जो गरीब युवतियों को बहला फुसला कर बेच देती हैं. लडकियों को पकडकर उन्हें नशीले पदार्थ सुंघाकर उनकी दुसरे पुरूषों के साथ शादी करा दी जाती है. कुछ जगह लडकियों को बेच कर उनकी शादी करा दी जाती है. आये दिन महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध बेटी बचाओ के नारे को झूठा साबित करते हैं. समानता की बात जमीनी स्तर पर कही नही दिखाई देती है. जो दुर्दशा आज स्त्रियों की हो रही है उससे मानव समाज को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है. प्रशासन में कड़े नियम कानून के साथ साथ उनका सख्ती के साथ पालन हो इस बात की भी बहुत आवश्यकता है. खुद प्रशासन को भी सुधरने की जरूरत है ताकि किसी पीड़ित व्यक्ति को निराश न होना पड़ें.
-प्रियंका वरमा महेश्वरी
(साभार: प्रियंका न्यूज़)
संपादक- स्वतंत्र भारत न्यूज़
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