सभी उद्योगों में ‘निश्चित अवधि के रोजगार’ की व्यवस्था लागू: बेरोजगारी को बढ़ाने वाला फैसला - मज़दूरों और युवाओं के पीठ में खंजर __ RSS
औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 में बदलाव किया.
श्रम कानून में बदलाव का यह दिन-शुक्रवार 16 मार्च 2018- काळा दिवस के रूप में दर्ज़ होगा.
___ [रेल सेवक संघ]
अब मज़दूरों/ कर्मचारियों की नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होगी जिसके बाद यदि सेवा पुनर्स्थापित नहीं की जाती है तो नियुक्ति अपने -आप खत्म हो जायेगी और कर्मचारी किसी तरह के नोटिस या मुआवजे की माँग नहीं कर सकेगा।
___ [श्रम एवं रोजगार मंत्रालय]
रेल सेवक संघ ने देश के सभी मजदूर संगठनों को एक मंच पर आने और निर्णायक संघर्ष करने का किया आह्वाहन.
नयी दिल्ली 17 मार्च: सरकार ने ‘निश्चित अवधि के रोजगार’ की व्यवस्था का विस्तार कर इसे सभी उद्योगों में लागू कर दिया गया है। अब तक यह व्यवस्था सिर्फ कपड़ा उद्योग में ही थी।
स्थायी कर्मचारियों के हितों की रक्षा की दिशा में भी बड़ा कदम उठाते हुए उन्हें निश्चित अवधि रोजगार की श्रेणी में लाने पर भी रोक लगा दी गयी है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की शुक्रवार को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि ‘निश्चित अवधि के रोजगार’ पर नियुक्त कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, काम के घंटे तथा शर्तें आदि किसी भी सूरत में स्थायी कर्मचारियों से कम नहीं हो सकतीं। लेकिन, उनकी नियुक्ति एक निश्चित अवधि के लिए होगी, जिसके बाद यदि सेवा पुनर्स्थापित नहीं की जाती है तो नियुक्ति अपने -आप खत्म हो जायेगी और कर्मचारी किसी तरह के नोटिस या मुआवजे की माँग नहीं कर सकेगा।
अधिसूचना के जरिये औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 में बदलाव किया गया है। यह भी प्रावधान किया गया है कि अधिसूचना जारी होने की तिथि पर जो कर्मचारी स्थायी सेवा में थे, कंपनियाँ उन्हें निश्चित अवधि सेवा में स्थानांतरित नहीं कर सकतीं। अधिसूचना शुक्रवार से ही प्रभावी हो गयी है।
इस पर तीखी प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए रेल सेवक संघ के महामंत्री - एस. एन. श्रीवास्तव ने कहा कि, "केंद्र सरकार, केवल उद्द्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए देश के मेहनतकश मजदूरों/ कर्मचारियों के साथ- साथ करोणों युवाओं के पीठ में खंजर भोकने का काम किया है.
रेल सेवक संघ ने पूछा कि, क्या केंद्र सरकार द्वारा श्रम- क़ानून में बदलाव कर "निश्चित अवधि रोज़गार व्यवस्था" लागू करना और इस पर देश के तमाम मजदूर संगठनों द्वारा चुप्पी साध लेना, आश्चर्यजनक ही नहीं, उनकी नियत पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न नहीं लगा दिया है ?-
महामंत्री- श्रीवास्तव ने कहा कि, श्रम कानून में बदलाव का यह दिन-शुक्रवार 16 मार्च 2018 - काळा दिवस के रूप में दर्ज़ होगा
श्रीवास्तव ने सभी मज़दूर सगठनों का आह्वाहन करते हुए कहा कि, यदि अब भी निर्णायक संघर्ष नहीं हुआ तो मजदूरों का नामो-निशान मिट जाएगा.
सभी श्रम संगठनों के नेताओं को चाहिए कि, अब मान्यता के नाम पर मिल रहे सुख-सुबिधा और अहम् को त्यागकर राष्ट्र-हित में देश के युवाओं और अपनी आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए एक संयुक्त मंच पर आएं और निर्णायक संघर्ष करे, रेल सेवक संघ संघर्ष के प्रत्येक फैसले में देश के मजदूर संगठनो/ मजदूरों के साथ है.
एक सवाल के जवाब में संघ के महामंत्री- श्रीवास्तव ने कहा कि, सरकार पहले "50 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों को बिना कारण बताओ नोटिश के जबरन रिटायर करने का आदेश वर्ष 2015 में लाई थी और अब मजदूरों/ युवाओं के रोजगार को समाप्त कर बेरोजगारों कि फ़ौज बढ़ाने का क़ानून मात्र इसलिए लाई है कि, पूंजीपतियों और उद्द्योगपतियों को लाभान्वित किया जा सके. इससे देश में बेरोजगारी बढ़ेगी, बेईमानी और भ्रष्टाचार बढ़ेगा, जिससे अराजकता और आतंकवाद और बढ़ेगा जो सभ्य समाज के स्तीत्व को समाप्त कर देगा, क्योंकि, लोग अपने रोजगार को बचाने के लिए चापलूसी और बेईमानी करने पर बाध्य होंगे. चापलूसी, बेईमानी और बेरोजगारी ही अराजकता और आतंकवाद की जननी है.
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