Breaking News Today At 00:25 A.M. छ: हज़ार से अधिक 6459 ट्रेनें निरस्त, 3101 ट्रेनों को पार्टली कैंसिल और 324 ट्रेनों का मार्ग बदलना पड़ा क्यों ? - क्या यही विकाश है ?-
On 03rd. Jan.2020 At 00:25 A.M.:
- बात किसी रूट की हो, 6459 ट्रेनें पूर्णतया निरस्त, 3101 ट्रेनों को पार्टली कैंसिल और 324 ट्रेनों का मार्ग बदलना पड़ा और हजारों ट्रेनें घंटों के हिसाब से लेट हैं, जिससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है।
- पूरे भारतीय रेल में तमाम रिजर्वेशन टिकट वापस करने पर यात्री मजबूर!!!
- मुख्य कारण: रेलवे की गलत नीतियां, ठेकेदारी और अब निजीकरण!!!
[S.N.SRIVASTAV, General Secry/Rail Sewak Sangh & President (U.P.)/LSP]
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लखनऊ: रेल के विकाश की आये दिन या यूँ कहें क़ि, लगभग रोज ही रेल के विकाश की बात, मीडिया के माध्यम से बड़े- बड़े प्रचार और बड़ी- बड़ी योजनाएं बतायी जाती है तथा रेल के अधिकारी विज्ञापनों से मीडिआ को खुश कर फर्जी प्रचार भी करते हैं, जिसमें उत्तर रेलवे, लखनऊ के मंडल रेल प्रबंधक और 'उत्तर रेलवे' तथा 'उत्तर मध्य रेलवे' अव्वल है।
बात किसी रूट की हो, 6459 ट्रेनें निरस्त, 3101ट्रेनों को पार्टली कैंसिल और 324 ट्रेनों का मार्ग बदलना पड़ा और हजारों ट्रेनें घंटों के हिसाब से लेट हैं, जिससे यात्रियों को दिक्कत हो रही है। ट्रेनों के अधिक लेट हो जाने से उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों से यात्रियों द्वारा अपने रिजर्वेशन टिकट वापस किए जाने की सूचना है। यात्री इसके पीछे लगभग 20 लाख कर्मचारियों की कमी के कारण बेतरतीब तरीके से मरम्मत कार्य, असुरक्षित ट्रैक, रेल संचालन नियंत्रण में लापरवाही जैसे तमाम कारण गिनाते हैं।
आज यात्री जितना परेशान है, आज-तक कभी नहीं था।
दिन पर दिन रेलवे की हालत ख़राब की जा रही है। 18 नवम्बर 2017 को एक हज़ार से अधिक ट्रेनें 1064 ट्रेनें निरस्त थीं तो आज दिनांक 03 जनवरी 2020 को यह संख्या छ: गुणा बढकर कुल पूर्णतया निरस्त ट्रेनों की संख्या 6459 हो गयी है।
आज दिनांक 03 जनवरी 20120 को रेलवे की हालत नवम्बर 2017 की तुलना में छ: गुणा से अधिक बढ़ चुकी है। इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रेल सेवक संघ के महामंत्री तथा लोकतान्त्रिक समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (उत्तर प्रदेश)- एस एन श्रीवास्तव ने कहा कि, "इसका मुख्य कारण: रेलवे की गलत नीतियां, ठेकेदारी और अब निजीकरण & व्यवसाईकरण है।"
उन्होंने कहा कि, "रेलवे को बचाना है तो रेलवे में लगभग 20 लाख रेल कर्मचारियों की स्थाई भर्ती करके भारतीय रेलवे को पूर्ववत श्रमोन्मुखी सार्वजनिक प्रतिष्ठान बनाना होगा और रेल को बेचना तथा इसका व्यवसाईकरण बंद करना पड़ेगा,
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भारत सरकार, रेल मंत्रालय, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष (CRB)/ मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को रेल को विकासोन्मुखी बनाने के लिए रेल की नीतियों को लेकर पुनर्विचार करना होगा।"
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