गौ-आधारित अर्थव्यवस्था का महाकुंभ: पुणे में ‘गौ टेक 2026’ का भव्य आगाज़
‘गौ टेक 2026’ में दिखेगा भारत का आत्मनिर्भर भविष्य
मुंबई (अनिल 'बेदाग'): पुणे एक बार फिर अपने बहुआयामी स्वरूप के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान गढ़ने जा रहा है। शिक्षा और आईटी हब के रूप में प्रसिद्ध यह शहर अब गौ-आधारित उद्योगों और नवाचार का केंद्र बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है। 20 से 23 मार्च 2026 तक शिवाजीनगर स्थित एग्रीकल्चरल कॉलेज ग्राउंड में आयोजित होने जा रहा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी ‘गौ टेक 2026’ इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इस भव्य आयोजन की शुरुआत 15 मार्च को भूमि पूजन (ग्राउंडब्रेकिंग) समारोह के साथ हो चुकी है। यह आयोजन इंटरनेशनल संस्था ग्लोबल कॉन्फेडरेशन ऑफ काउ बेस्ड इंडस्ट्रीज, महाराष्ट्र गौ सेवा आयोग और आरआर काबेल के सहयोग से किया जा रहा है। भूमि पूजन समारोह में राज्यसभा सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी, जीसीसीआई के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. वल्लभभाई कथीरिया, महाराष्ट्र गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष शेखर मुंडदा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
डॉ. मेधा कुलकर्णी ने अपने संबोधन में कहा कि पुणे को अब गौ सेवा और गौ-आधारित पहल के केंद्र के रूप में भी पहचान मिलनी चाहिए। उनके अनुसार ‘गौ माता’ की अवधारणा केवल आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अर्थव्यवस्था से जुड़े अनेक आयाम समाहित हैं। ‘गौ टेक 2026’ इन सभी पहलुओं को आम जनता तक पहुंचाने का एक प्रभावी मंच बनेगा।
वहीं डॉ. वल्लभभाई कथीरिया ने इस आयोजन को एक वैश्विक आंदोलन करार देते हुए कहा कि यह केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को केंद्र में रखकर भारत को आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने का प्रयास है।
इस आयोजन में देश-विदेश से नीति-निर्माता, वैज्ञानिक, उद्योगपति, स्टार्टअप्स, निवेशक, किसान और युवा भाग लेंगे। साथ ही 20 श्रेणियों में 60 विशिष्ट व्यक्तियों को ‘गौ टेक अवॉर्ड्स’ से सम्मानित किया जाएगा।
चार दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में 300 से अधिक स्टॉल, 10 से ज्यादा थीमैटिक कॉन्फ्रेंस, बी2बी मीटिंग्स और कई विशेष सत्र आयोजित होंगे। प्रदर्शनी में ऑर्गेनिक खाद, बायो-फर्टिलाइजर, डेयरी उत्पाद, गौमूत्र और गोबर आधारित उत्पाद, प्राकृतिक खेती, पशु चिकित्सा, सौर ऊर्जा, बायो-एनर्जी, बीज और चारा उद्योग जैसे विविध क्षेत्रों से जुड़े नवाचार देखने को मिलेंगे। इसके अलावा देशी गायों की नस्लों की लाइव प्रदर्शनी और पंचगव्य उत्पादों पर लाइव ट्रेनिंग भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
आयोजन के संयोजक शेखर मुंडदा के अनुसार, इस एक्सपो में पांच लाख से अधिक लोगों के आने की उम्मीद है, जो इसे एक विशाल जन-आंदोलन का रूप देगा। खास बात यह है कि इस चार दिवसीय आयोजन में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल होकर जानकारी और प्रेरणा प्राप्त कर सकें।
‘गौ टेक 2026’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सोच है—जहां परंपरा और आधुनिक तकनीक मिलकर एक नए भारत की तस्वीर गढ़ रही हैं। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि अगर सही दिशा और मंच मिले, तो भारतीय परंपराएं भी वैश्विक स्तर पर नवाचार और विकास का आधार बन सकती हैं।
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